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Mar 21, 2017

भाजपा का एक छोटा सा साक्षात्कार

भाजपा की विकास यात्रा पर वरिष्ठ लेखक राजकिशोर ने लिया व्यंग्यात्मक साक्षात्कार 

प्रश्न : तुम्हारा नाम क्या है?
उत्तर : भाजपा कुमारी
प्रश्न : किस की बेटी हो?
उत्तर : आर एस एस पांडे की
प्रश्न : तुम्हारी उम्र?
उत्तर : यही कोई सैंतीस साल।
प्रश्न : उम्र के हिसाब से तो काफी फैल गयी हो।
उत्तर : मत पूछिए। एक बार ऐसी बीमार पड़ी थी कि मेरा वजन बस दो किलो रह गया था।
प्रश्न : उस के बाद सेहत कैसे बनी?
उत्तर : मैं नियमित रूप से वर्जिश करती हूँ। सुबह छह से सात। लाठी भाँजने में कई बार फर्स्ट आ चुकी हूँ। कुछ घरानों से टॉनिक भी आ जाता है।
प्रश्न : फिर भी इतनी जल्दी, इतना विकास?
उत्तर : अंकल, इस में मेरा दोष नहीं है। मेरी फ्रेंड्स सिकुड़ती गयीं और उन की जगह मुझे मिलती गयी। अब तो मैं ही मैं हूँ।
प्रश्न : तब तो तुम्हारी अभिलाषा पूरी हो चुकी होगी।
उत्तर : अभी कहाँ। इतनी उम्र हो गयी, पर शादी नहीं हुई। कुँवारी हूँ।
प्रश्न : क्या किसी खास लड़के का इंतजार कर रही हो?
उत्तर : हाँ, भारत कुमार।
प्रश्न : पर उस के पीछे तो और भी लड़कियाँ पड़ी हैं - रेशमा है, कावेरी है, उज्ज्वला है, ललिता है, गुलनार है, नालंदा है...
उत्तर : यही तो चुनौती है। पर पापा कहते हैं, लगी रहो, एक न एक दिन सफलता जरूर मिलेगी।
प्रश्न : आजकल भारत कुमार बहुत बीमार है। कुपोषित है। उस का पूरा शरीर दर्द करता है। उसका स्वास्थ्य लौटाओगी, तभी तो उसे पाओगी।
उत्तर : जितना होता है, करती ही हूँ। पर मेरा लक्ष्य कुछ और है।
प्रश्न : तुम्हारा लक्ष्य क्या है?
उत्तर : पकड़ुआ विवाह करना। पर और लोग भी इसी फिराक में हैं। किसी के हिस्से में हाथ आते हैं, किसी के हिस्से में पैर। पूरा किसी के हाथ में नहीं आता।
प्रश्न : ऐसे हाथ नहीं आने वाला। उसे सर्वांग सुंदरी चाहिए।
उत्तर : इस समय मुझ से सुंदर कौन है?
प्रश्न : सो तो है। पर तुम्हारी हथेली में यह खून कैसे लगा? कहाँ से आ रही हो?
उत्तर : चुप कीजिए। आप जैसे देशद्रोहियों का जवाब मैं नहीं देती।

Jan 23, 2017

तारेक फतेह जी न्यूज पर क्यों, उसके पीछे की कहानी सुनिए!


बीजेपी चुनाव से बहुत पहले ही उत्तर प्रदेश में लव जेहाद, गो हत्या, घर वापसी जैसे सारे बम फोड़ चुकी है। भाजपा कार्यकारिणी इस समय मुश्किल में है। कोई मुद्दा नहीं मिल रहा कि भाजपा प्रदेश स्तर पर बीच बहस में सबसे उपर दिखे या टीवी वाले यह भी बोल सकें कि जी, भाजपा की लहर है। 

कल परचा दाखिला का पहला दिन है। 11 फरवरी को 73 सीटों पर चुनाव है लेकिन मोदी जी ने जैसी हवा का बहाने का टार्गेट संघ और पार्टी को दिया है, उसकी हवा निकल चुकी है। कार्यकर्ताओं को बुस्टअप करने की सारी तरकीबें बेकार जा रही हैं।

ऐसे में मुद्दा बनाने के लिए भाजपा को अपने पार्टनर चैनल 'जी न्यूज' का सहारा लेना पड़ रहा है।

संघ के एक छुटभैया नेता 'भाईजी' के शब्दों में, 'कार्यकारिणी को क्या समझ में आता है? वह तो बस विधायक—सांसद बनने की तेजी में रहते हैं, अपनी गोट सेट करते हैं। आइडिया तो हमलोग देते हैं भाई जी। और हमने दिया भी। अब आप देखिएगा ​कैसे कल से यूपी चुनाव के बहस की दिशा बदलते हैं।'

करीब सप्ताह भर पहले मैं अपने एक नेता मित्र के साथ था, 'मैंने पूछा किया क्या? दंगा कराएंगे क्या?'

संघ के नेता मेरा हाथ थामते हुए, 'भाई जी दंगा नहीं अबकी विमर्श होगा, बहस होगा और जो उचित होगा उसपर फैसला होगा। हां, वे दंगा चाहेंगे तो दंगा भी होगा। पर हम हिंसा विरोधी हैं।'

फिर मैंने अपना सवाल दोहराया, 'किया क्या?'

संघ के नेता, 'तारेक फतेह को खड़ा कर दिया? अब जवाब दें मुसलमान। अब देखें कौन पार्टी है जो हिंदुओं को एकजुट होने से रोक पाती है।'

मैं, 'लेकिन वह तो भारत का ना​गरिक ही नहीं। फिर कैसे आपने खड़ा किया?'

संघ के नेता, 'चुनाव में नहीं भाई जी। टीवी में। उसमें कोई नागरिकता की जरूरत नहीं।'

मैं, 'मतलब गेस्ट बनाया। किस चैनल पर। क्या​ डिबेट है, कब है।'

संघ के नेता, 'देख लीजिएगा, खुद की पता चल जाएगा?'

फिर भी, 'क्या जी न्यूज पर।'

फिर वह और नेता मित्र हंस पड़े। तो मुझे समझ में आ गया ​कि तारेक फतेह जी न्यूज पर मसला बदलने आ रहे हैं। उत्तर प्रदेश में भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने आ रहे हैं।

मैंने खुद से सवाल किया कि क्या कोई चैनल या मीडिया माध्यम ऐसा हो सकता है कि वह एक पार्टी का मुखपत्र ही माना जाने लगे। क्या इस प्रवृत्ति के रहते कल को वह अपने व्यावसायिक रूप बनाए रख पाएगा या उसे लोग मीडिया मानने को तैयार होंगे?

फिर याद आया कि जी न्यूज कर भी और क्या सकता है। आखिर भाजपा सरकार ने जो 7770 करोड़ को जो अहसान लादा है, आखिर उसको उतारने का और कोई क्या तरीका हो सकता है।

आप सबको याद होगा कि जी न्यूज की मालिक कंपनी 'एस्सेल ग्रुप' को हरियाणा और केंद्र सरकार ने मिलकर 7750 हजार करोड़ रुपए का ठेका दिया है। यह ठेका केेंद्रीय परिवहन मंत्रालय और हरियाणा सरकार ने दिया है।

ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि उत्तर प्रदेश की जनता एक मीडिया ग्रुप के व्यावसायिक लाभ के चक्रव्यूह और पार्टी के शातिराना तैयारी में फंसती है या इनको नोटिस ही नहीं करती!!!

Jan 20, 2017

जैसी भाजपा की चाहत वैसी मीडिया की सोच...

1. भाजपा चाहती है कि हर कीमत पर उत्तर प्रदेश में टक्कर में भाजपा—सपा दिखे, मीडिया ऐसा ही पेश कर रही है।

2. भाजपा चाहती है कि प्रदेश में धर्मनिरपेक्षता ही असल सवाल बने, मीडिया उसे ही मुद्दा बना रही है।

3. भाजपा चाहती है​ कि सांप्रदायिक तनाव की एक स्यूडो स्थिति पैदा हो, जिससे दूसरी पार्टियां सांप्रदायिकता पर केंद्रीत हों, मीडिया ऐसा ही कर रही है।

4. भाजपा चाहती है कि लोग नोटबंदी के बाद बढ़ी बेकारी और पलायन को भूल जाएं, उसकी असफलता मुद्दा न बने, मीडिया ऐसा ही कर रही है।

5. भाजपा चाहती है कि उत्तर प्रदेश में बसपा सीन में नहीं दिखे, मीडिया ऐसा ही कर रही है।

6. भाजपा चाहती है कि नोटबंदी से तबाह हुए गरीब यूपी में मायावती के पक्ष में एकजुट न हों, उन पर स्टोरी न हो, मीडिया ऐसा ही कर रही है।

7. भाजपा चाहती है कि प्रदेश में बस दो ही मुद्दे हों हिंदू और मुसलमान, परिवार और पहलवान, मीडिया ऐसा ही कर रही है।

फिर भी आप मीडिया से कुछ एक्स्ट्रा की उम्मीद में इस चैनल से उस चैनल को टप—टप दाबे जा रहे हैं तो मेरी एक सुकुमार राय है मानिए...बी फोर म्यूजिक लगाइए और सुनिए...

'साजन मेरा उस पार है, मिलने को दिल बेकरार है...बेकरार...बेकरार है

Jan 18, 2017

मित्रों! एनडी तिवारी प्ले व्वाय नहीं, नेता हैं

आप फेसबुक को एक तरफ से खंगाल लीजिए। बारी—बारी से सबकी वॉल देख लीजिए। आपको गिनती के लोग नहीं मिलेंगे जो एनडी तिवारी की भाजपा में जाने पर राजनीतिक आलोचना कर रहे हों और पूछ रहे हों कि राष्ट्रवादी यजमानी खाये बिना कब्र में शांति नहीं मिलेगी क्या पंडीजी? 

सभी उनके 'सेक्स कांड' की चर्चा कर रहे हैं? इस चर्चा में जाति—धर्म—लिंग—संप्रदाय की दीवारों को तोड़कर लोग समवेत स्वर में सेक्स के शॉट्स से लेकर तस्वीरें शेयर कर रहे हैं।

भरे—पुरे चुनावी मौसम में यह सब देख ऐसा लग रहा है मानो एनडी तिवारी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि 'राष्ट्रवादी प्ले ब्वॉय' रहे हों और उन्होंने लखनउ और देहरादून में राज्य की मुखिया की नहीं, बल्कि कोठे के मालिक की भूमिका निभाई हो।

उनकी प्ले ब्वाय की छवि और लोगों का बड़े पैमाने पर फेसबुक पर चल रहा 'पोर्नवादी' आनंद बताता है कि चुनावों में मुद्दा और मुद्दे की राजनीति सामाजिक कार्यकर्ताओं की जुगाली, अखबारों के संपादकीय और टीवी के पकाउ डिबेट्स की चीज बनकर रह गयी है।

अन्यथा जो आदमी उत्तर प्रदेश का तीन बार और उत्तराखंड का एक बार मुख्यमंत्री रह चुका हो उसको लेकर सबसे लोकप्रिय और जनप्रिय सवाल उसका सेक्स कांड ही क्यों बनता? ​वह भी वह सेक्स कांड जिसमें कोई शिकायतकर्ता नहीं है, सिवाय कि किसी ने चोरी से वीडियो बना लिया।

Nov 8, 2016

यह भाजपा की परिवर्तन रैली का वीडियो है, किसी मुजरे का नहीं

वीडियो देख  सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि मोदी जी क्या ठुमकों के सहारे उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाएंगे।  लोग यह भी जानना चाह रहे हैं कि पाकिस्तानी मुजरे वाले डांस स्टाइल से आरएसएस के लोगों को इतना लगाव क्यों है



समाजवादी पार्टी की ओर से 3 नवंबर को जो रथयात्रा शुरू हुई है उसको चुनौती देने के लिए कल से भाजपा अध्यक्ष ​अमित शाह के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश भाजपा ने परिवर्तन यात्रा शुरु की। कल परिवर्तन यात्रा का पहला दिन था। पर यात्रा के पहले ही दिन स्थानीय नेताओं को मनोबल इस कदर गिरा हुआ था कि नेताओं को भीड़ जुटाने के लिए बार डांसरों के ठुमकों का सहारा लेना पड़ा। 

Nov 7, 2016

भाजपा की परिवर्तन यात्रा बार डांसरों के भरोसे

स्थानीय नेताओं का मानना था कि अगर भीड़ रोकनी है तो मंत्री—सांसद के भाषण से जरूरी बार डांसरों की अदाएं और ठुमके हैं। 



समाजवादी पार्टी की ओर से 3 नवंबर को जो रथयात्रा शुरू हुई है उसको चुनौती देने के लिए कल से भाजपा अध्यक्ष ​अमित शाह के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश भाजपा ने परिवर्तन यात्रा शुरु की। कल परिवर्तन यात्रा का पहला दिन था। पर यात्रा के पहले ही दिन स्थानीय नेताओं को मनोबल इस कदर गिरा हुआ था कि नेताओं को भीड़ जुटाने के लिए बार डांसरों के ठुमकों का सहारा लेना पड़ा। 

स्थानीय नेताओं का मानना था कि अगर भीड़ रोकनी है तो मंत्री—सांसद के भाषण से जरूरी बार डांसरों के फूहड़ गीत और ठुमके हैं। गौरतलब है कि अभी भाजपा अध्यक्ष अ​मित शाह द्वारा सोमवार को  बुंदेलखंड में किए चुनावी वादे, कि भाजपा जीतेगी तो हर बुंदेली को कार देंगे, को लेकर सोशल मीडिया पर मजाक बनना बंद भी नहीं हुआ था कि परिवर्तन यात्रा को लेकर यह खबर आ गयी। 

सुचिता की राजनीति का दंभ भरने वाली भाजपा को भी उत्तर प्रदेश के बागपत में भीड़ जुटाने के लिए अपने नेताओं से अधिक बार डांसरों पर भरोसा करना पड़ा। एबीवी की वेबसाइट पर छपे खबर के मुताबिक स्थानीय नेताओं को मंत्री और सांसद के आने से पहले भीड़ को रोकने के लिए डांस कराना पड़ा। 

वेबसाइट के मुताबिक बागपत में बीजेपी की परिवर्तन यात्रा के मंच पर नेताओं के आने में जरा सी देर हुई तो मंच संभाल लिया एक डांसर ने. दरअसल यूपी में बीजेपी की परिवर्तन यात्रा के कैराना से बागपत के तुगाना पहुंचने पर ये कार्यक्रम किया गया था, केंद्रीय राज्य मंत्री संजीव बालियान और बीजेपी सांसद सत्यपाल सिंह के इंतजार में लोग बैठे थे…भीड़ कहीं भाग ना जाए इसलिए आयोजकों ने मंच पर बार बाला को उतार दिया.

Oct 20, 2016

भाजपा आपको भटका रही है और आप भटकने के एक्सपर्ट बनते जा रहे हैं

पिछले दो दशकों से जनसंघर्षों की अगुवाई कर रहे हिमांशु कमार का महत्वपूर्ण हस्तक्षेप

भाजपा बड़ी चालाकी से सारी राजनैतिक बहस को असली मुद्दों से हटा कर गाय, मुसलमान, पाकिस्तान जैसे काल्पनिक मुद्दों पर ले गयी है। इनकी साजिश को पहचानिए, इन्हें असली मुद्दों पर खींच कर लाइए...

डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत सरकार ने गरीबों को राशन मिलने के तरीके में कुछ बदलाव किये हैं। अब गरीबों के लिए दो नए नियम बनाये गए हैं।

पहला तो यह की राशन उसी को मिलेगा जिसके पास आधार कार्ड होगा। अब आधार कार्ड तो उसी का बन सकता है जिसके पास पहले से कोई पहचान पत्र हो। लेकिन जो लोग फुटपाथ पर रहते हैं, ट्रांसजेंडर, बेघर और प्रवासी मजदूर हैं इनके पास कोई पहचान पत्र नहीं हैं, इसलिए इनका आधार भी नहीं बनेगा .

और इनका आधारकार्ड नहीं बनेगा तो इन्हें राशन भी नहीं मिलेगा, जबकि सस्ते राशन की ज़रूरत तो सबसे ज्यादा इन्हीं लोगों को है। यानि जिन लोगों को राशन की सबसे ज्यादा ज़रूरत है, उन्हें ही सरकार नें धक्के मार कर बाहर खदेड़ दिया है। इसके अलावा सरकार नें राशन दुकानों में अंगूठे और उँगलियों के निशान के मार्फत ही राशन देने का नियम बना दिया है।

अब जो मजदूर पत्थर ढोने का काम करते हैं या अमीरों के घरों में बर्तन साफ़ करने वाली महिलायें हैं, उनकी उँगलियों के निशान घिस जाते हैं या सर्दियों में उंगलियों की खाल फट जाती हैं। इन हालातों में दूकान पर दी गयी मशीन उँगलियों के निशान नहीं पहचानती, बुढापे में झुर्रियां पड़ने से भी मशीन उँगलियों के निशान नहीं पहचानती।

इसकी वजह से मजदूर, महिलायें और बुजुर्ग लोग कई किलोमीटर पैदल चल कर आते हैं और मशीन के द्वारा उँगलियों के निशान ना पहचाने जाने पर खाली हाथ वापिस चले जाना पड़ता है। कई महीनों तक राशन ना देने के बाद दुकानदार लिख देता है की यह व्यक्ति राशन लेने नहीं आता है। क्योंकि सरकार द्वारा दूकान वालों को यही आदेश दिया गया है, इसके बाद ऐसे लोगों के राशन कार्ड रद्द कर दिए जाते हैं।

जाहिर है लाखों गरीबों का राशन लेने का हक सरकार साजिश करके मार रही है। एक तरफ अंबानी जैसे धनिकों को पैसे के बल पर सारे देश की आबादी की दाल से मुनाफा कमाने और तीन गुना कीमत कर देने की सहूलियत दी जा रही है। वहीं जान—बूझ कर गरीब को राशन की दूकान से भगा कर बाज़ार से सामान खरीदने की साजिश पर काम चालू है ताकि गरीब मजदूर की जेब से भी मुनाफ़ा निकाल कर तिजोरी में डाला जा सके।

हम सरकार को चुनौती देते हैं कि सरकार में दम है तो गरीब जनता से जुड़े मुद्दों पर राजनीति कर के दिखाए। सर्जिकल स्ट्राइक जैसे काल्पनिक मुद्दों पर सारे देश का ध्यान भटकाने की साजिश बंद करी जाय। चुनाव भी देश की गरीब जनता के मुद्दे पर लड़ कर दिखाइये।

देश की गरीब जनता की बात कोई नहीं सुन रहा है। भाजपा बड़ी चालाकी से सारी राजनैतिक बहस को असली मुद्दों से हटा कर गाय, मुसलमान, पाकिस्तान जैसे काल्पनिक मुद्दों पर ले गयी है। इनकी साजिश को पहचानिए, इन्हें असली मुद्दों पर खींच कर लाइए, अगर आप भाजपा के मुद्दों पर बहस में फंसेंगे तो वो आपको अपने मैदान में पीट कर भगा देंगे। इन संघियों को अपने मैदान में घसीट कर लाइए,
ये यहाँ मार खायेंगे कि ये हिन्दुओं की नहीं अमीरों के गुलामों की सरकार है।

Oct 6, 2016

अखलाक के हत्या के आरोपी को तिरंगें में लपेटकर दिया सम्मान

सैनिकों की शहादत पर ओढ़ाया जाने वाला तिरंगा क्या अब अपराधियों शान बनेगा

मोदी युग में पहली बार किसी दंगाई और गुंडे को तिरंगे में लपेटे जाने का मामला सामने आया है जिसके बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या जाति और धर्म के आधार पर देश में अपराधियों के अपराध तय होंगे या देश में कानून का राज कायम होगा।

उत्तर प्रदेश के दादरी में हुआ चर्चित अखलाक हत्याकांड के एक आरोपी रवि की मंगलवार को एक अस्पताल में मौत हो गई। 22 साल के रवि के गुर्दों ने काम करना बंद कर दिया था जिसके बाद उसे उत्तर प्रदेश के नोयडा स्थित जिला अस्पताल से लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल लाया गया था। अस्पताल जब उसे घरा लाया गया तो हिंदू संगठनों के लोगों ने उसके शव को तिरंगें में लपेट दिया और फिर घर लेकर आए।

गौरतलब है कि दादरी के बिसाहड़ा गांव में 51 साल के मोहम्मद अखलाक को पिछले साल भीड़ ने पीट- पीट कर मार डाला था जिसके बाद क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव हो गया था। भीड़ को संदेह था कि अखलाक गौमांस का सेवन करते थे। गांव में दंगा करने और अखलाक की हत्या करने में दस नामजद आरोपी शामिल थे, उनमें एक रवि भी था, जिसकी मंगलवार को दिल्ली के अस्पताल में मौत हो गयी।

28 सितंबर की रात करीब साढ़े दस बजे गांव के 14-15 लोग हाथों में लाठी, डंडा, भाला और तमंचा लेकर घर की तरफ गाली-गलौज करते हुए आए और दरवाजे को धक्का मारकर घुस गए थे और अखलाक और उनके बेटे दानिश को जान से मारने की नीयत से मारने लगे थे. इस वारदात में अखलाक की मौत हो गयी थी।
दंगे और अख़लाक़ के हत्या के आरोपी रवि को मिला तिरंगे का सम्मान। कानून का समय है या धार्मिक उन्माद का

Sep 23, 2016

जो तस्वीर लाखों में शेयर हो रही है, जानिए उसके फोटोग्राफर का नाम

रांची के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में ​बगैर थाली जमीन पर खाना खा रही महिला की फोटो वायरल होने के बाद अब पहला सवाल सबके मन में यही है कि किसने खिंची यह फोटो।

सबको लग रहा होगा कि जरूर किसी पत्रकार या फोटोग्राफर ने फोटो खिंची होगी। पर इसका सच कुछ और है।

कल रांची से प्रकाशित दैनिक भास्कर, प्रभात खबर और हिदुस्तान में जमीन पर खाना खाती फोटो छपी। महिला बगैर थाली सीधे फर्श पर दाल, चावल और सब्जी रखकर खा रही थी। ​फोटो इतनी झकझोर देने वाली है कि देखते ही देखते लाखों लोग शेयर करने लगे।

शेयर करने वाले कई लोग यह भी कहने लगे कि सदी की त्रासदी दिखाने वाली तस्वीरों में इसे शुमार किया जाएगा और उस फोटोग्राफर को महान कहा जाएगा। पर उसका नाम कहीं दर्ज हो तब तो। लोगों ने ढूंढा भी तो मिला नहीं।

पता करने पर इस तस्वीर के सामने आने की कहानी पता चली और वह फोटोग्राफर भी जिसने यह फोटो खिंची।

रांची के रिम्स अस्पताल में भाजपा कार्यकर्ता रामवृक्ष ठाकुर का ​भाई भर्ती था। उसे ही देखने रांची भाजपा के महानगर मंत्री केके गुप्ता, जिलाध्यक्ष मनोज मिश्र  अपने कुछ परिचितों के साथ रिम्स पहुंचे।

वहीं सबने देखा कि एक महिला जमीन पर खा रही है। उसके बाद मंत्री केके गुप्ता ने अपनी मोबाइल से उसकी फोटो खिंची। उसके बाद केेके गुप्ता एक प्रेस विज्ञप्ती और फोटो के साथ अखबारों के दफ्तर पहुंचे, जिसके बाद यह फोटो दुनिया के सामने आ सकी।

रांची महानगर मंत्री और केके गुप्ता बताते हैं कि एक अखबार ने उनका नाम छापा है पर दूसरे अखबारों ने उनका नाम नहीं दिया। इसमें मैं क्या कर सकता हूं लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि मैंने ही वह फोटो खिंची है। महानगर भाजपा अध्यक्ष मनोज मिश्र कहते हैं, दोषियों पर कार्यवाही हो चुकी है पर हमलोंगों ने उसी समय 7—8 मरीजों को थाली खरीदकर दे दी, जिनके पास थालियां नहीं थीं।


गेस कीजिए ये लोग क्यों हंस रहे हैं

यह फोटो वरिष्ठ पत्रकार शरद गुप्ता के फेसबुक वाल से है। उन्होंने फोटो यह लिखते हुए शेयर की है कि गेस ​कीजिए तीन पूर्व प्रधानमंत्री क्यों हंस रहे होंगे?

जाहिर है प्रधानमंत्री हैं तो किसी​ छिछोरी बात पर तो नहीं ही ही हंस रहे होंगे। छिछोरी बातों पर तो सिर्फ जनता हंसती है। ये बड़े लोग हैं। गभीर बातों पर ही हंसते होंगे।

जैसे धर्म, राजनीति, कूटनीति या अर्थशास्त्र पर। यह लोग किसी सेक्स संबंधी चर्चा करके हंसते होंगे नहीं। नहीं आसपास की औरतों पर छिंटाकसी कर आनंद लेते होंगे।

फोटो में क्रमश: बाएं से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई, पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर हैं और नीचे बैठी हैं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी।

सोनिया गांधी भी आम महिलाओं की तरह छिंटाकसी वाली हंसी से दूरी बनाए रखने के लिए गंभीर मुद्रा में नहीं बैठी होंगी, बल्कि वह भी किसी गंभीर और जहीन मसले पर विचारमग्न होंगी।

ये सभी बातें संभावना की हैं ऐसे में आप भी संभावना से बता सकते हैं कि तीन प्रधानमंत्री किस बात पर हंस रहे हैं...