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Jan 28, 2016

कत्ल के अनुसंधान

नवल सिंह

कत्ल के अनुसंधान
कल्त का उन्होंने
नया तरीका खोजा निकाला
जिसमें
ना तो कोई सबूत
ना इल्जाम
ना ही होते है खुन के छीटे
 
वो छीन लेते है
नथुनों की हवा
वो चुराते है
स्वाभिमान, गौरव
भरते है जबरदस्ती ठूस-ठूस कर
आत्मगलानी, निराशा, अपमान
दमधोटू इंजन से
ढकेलते है जिन्दगी की रेल को
मौत की खाई में
 
नामाकरण करते
हवा के उडाते बुलबुले सा
आत्महत्या का
मिमयाते
नाजायज कारण
जो संडाध मारते निकलते
उनके मुखारविन्द से
मृतक के
जनाजे में टांगते है
डरपोक, देशद्रोही, अराजक
के तमगे
 
पर इतने सब पर भी
वो
कहां छुपा पाते है
रक्त से सने नाखुन
आदमखोर दांत
आकाओं से डाट खाकर
वो फिर से जुटते है
नए कत्ल के अनुसंधान में
जो कत्ल ना लगे

Jul 10, 2011

नागार्जुन के नाम

पीयूष पन्त की कविता


शब्द हुए बंधक
कलम हुई दासी
जनता में फैली अजब उदासी
मुट्ठी जब भिंचती है उठने को ऊपर
त्योरियां तब चढ़ जाती हैं उनकी क्यों कर
नारे उछलते हैं गगनभेदी
मानो बजती हो दुन्दुभी जनयुद्ध की

होते इशारे फिर कहर है बरपाता
जनता पर डंडे और गोली बरसाता
बार- बार लोकतंत्र की कसमें है खाता
सत्ता के नशे में रहता मदमाता
फिर भी वो जनता का नेता कहलाता

कैसा ये लोकतंत्र कैसी आज़ादी
बोलने समझने की, जहाँ ना हो मुनादी



विदेशी मामलों के महत्वपूर्ण टिप्पणीकार और सामाजिक आन्दोलन से जुडी 'लोक संवाद' पत्रिका के संपादक.