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Jul 10, 2011

राहुल की महापंचायत किसानों के साथ धोखा

लखनऊ. पूरे देश में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलनरत किसानों की उठ रही मांग के अनुरूप मानसून सत्र में केन्द्र की यूपीए सरकार द्वारा अंग्रेजों के बनाए 1894 के भूमि अधिग्रहण के काले कानून को रद्द करने की स्पष्ट घोषणा न करके राहुल गांधी ने कल अलीगढ किसान पंचायत में बुलाए किसानों को धोखा ही दिया है। यह प्रतिक्रिया जन संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय संयोजक अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने आज अलीगढ़ में कांग्रेस द्वारा बुलायी किसान पंचायत पर दी।

            
अखिलेन्द्र ने कहा कि कारपोरेट का हित और किसानों के भले के लिए लफ्फाजी एक साथ नही चल सकती। हरियाणा जिसका राहुल बार-बार जिक्र कर रहे है वहां भी किसानों के लिए कोई स्वर्गराज नहीं है और यह भी कि इस इलाके के सभी किसान विकास के लिए जमीन देना चाहते है सच नहीं है। क्योकि ग्रेटर नोएडा के दादरी, भट्टा पारसोल, अलीगढ़ के टप्पल, कृपालपुर, जहानगढ़, कनसेका, आगरा के एत्मादपुर, खंदौली, चौगान, छलेसर, गढ़ीरामी और मथुरा तक में कई किसान है जो किसी भी कीमत पर अपनी जीविका के साधन जमीन को नही देना चाहते है।

हाल ही में दिए अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट तक ने इस बात को माना है कि विकास के नाम पर ही किसानों को छला गया है। दरअसल 1894 के कानून में जनहित की स्पष्ट व्याख्या न होने से ही सरकारें किसानों को विकास के नाम पर ठगती रही है और यही काम हरियाणा में भी कांग्रेस की सरकार कर रही है। बिल्डरों और कारपोरेट घरानों के हितों के लिए किसानों को बर्बाद करने की कांग्रेस और मायावती की नीतियां एक ही है।

उन्होनें कहा कि 1894 के भूमि अधिग्रहण कानून को रद्द करने और नयी भूमि उपयोग नीति बनाने के सवाल पर जन संघर्ष मोर्चा, भारतीय किसान पार्टी समेत देष में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलनरत किसान संगठनों के प्रतिनिधि आगामी 8 अगस्त को दिल्ली में किसान सम्मेलन करेगें।