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Jun 22, 2017

मध्य प्रदेश के 15 मुस्लिम युवाओं पर दर्ज देशद्रोह का मुकदमा वापस

18 जून को लंदन में आईसीसी चैंपियंस ट्राॅफी में भारत की हार के बाद मोहद के निवासियों ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि कुछ लोगों ने भारत की हार का जश्न मनाया है...

विष्णु शर्मा की रिपोर्ट 

मध्य प्रदेश के मोहद में पुलिस ने तीन दिन पहले पाकिस्तान समर्थक नारे लगाने के आरोप में जिन 15 मुस्लिम युवाओं को गिरफ्तार किया था उन पर से राजद्रोह का मामला वापस ले लिय है। बुरहानपुर जिले के एसपी आरआर परिहार ने मीडिया को बताया कि गिरफ्तार किए गए युवाओं पर राजद्रोह का आरोप साबित करना मुश्किल है।


आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी में भारत की हार पर मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में आतिशबाजी कर पाकिस्तान के समर्थन और भारत के खिलाफ नारे लगाने के आरोप में 15 युवकों को गिरफ्तार किया गया था. सभी के खिलाफ देशद्रोह का प्रकरण भी दर्ज किया गया था.

गौरतलब है कि एक आरोपी के पिता ने राष्ट्रपति, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग एवं राष्ट्रीय और राज्य अल्पसंख्यक आयोगों को पत्र लिख कर इस मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया था, जिसके बाद पुलिस ने राजद्रोह की धाराएं हटा लीं।

18 जून को लंदन में आईसीसी चैंपियंस ट्राॅफी में भारत की हार के बाद मोहद के निवासियों ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि कुछ लोगों ने भारत की हार का जश्न मनाया है। रिपोर्ट पर कार्रवाही करते हुए पुलिस ने इन युवाओं को गिरफ्तार किया था।

मध्य प्रदेश में पिछले तीन सालों में साम्प्रदायिक सदभाव कम हुआ है और टकराव की घटनाएं बढ़ी हैं। इसका कारण है कि लगातार तीन बार प्रदेश में सरकार बनाने वाली भारतीय जनता पार्टी को आगामी चुनोवों में अपने प्रदर्शन को लेकर संशय होने लगा है। और इसलिए उसे साम्प्रदायिक तानव का सहारा लेना पड़ रहा है। 

पिछले साल अक्टूबर में राजधानी भोपल के समीप एक जेल से कथित तौर पर फरार होने की कोशिश करने वाले 8 कथित सीमा कार्यकर्ताओं की इंकाउण्टर की पुलिसिया कहानी पर भी सवाल उठे थे। इनकाउंटर के बाद ऐसे वीडियों सामने आए थे जो पुलिस की कहानी पर सवाल उठाते थे। 

आमतौर पर साम्प्रदायिक सदभाव वाली छवि रखने वाले प्रदेश के ‘मामा’ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर जैसे से संकट के बादल घिरते जा रहे हैं उनके चहरे पर से भी ‘मामियत’ का नकाब उठता जा रहा है। 2014 के बाद, शिवराज सिंह चौहान खुद को पार्टी में लगातार अकेला पा रहे हैं। मध्य प्रदेश भाजपा में उनकी पकड़ लगातार कमजोर होती गई है। 

पिछले आम चुनाव के बाद पार्टी का नरेन्द्र मोदी विरोधी खेमा यह आशा कर रहा था कि मोदी-शाह के कमजोर पड़ते ही शिवराज सिंह चौहान एक विकल्प के रूप में उभरेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ और मोदी-शाह खेमे ने राष्ट्रीय राजनीति को पूरी तरह से अपने कब्जे में कर लिया। और तो और, व्यापमं घोटाले की सीबीआई जांच ने शिवराज की डोर इसी जोड़ी के हाथों में थमा दी है। 

लोग बताते हैं कि हाल के किसान आंदोलन के दौरान भी मुख्यमंत्री की कार्य क्षमता पर पार्टी के अंदर ढेरों सवाल उठाए गए। इन तमाम वजहों से शिवराज को अपने राजनीतिक भविष्य की चिंता सताते लगी है। आगामी विधानसभा चुनाव तक वे ऐसा कुछ नहीं करना चाहते जिससे प्रदेश की राजनीति में उनकी दावेदारी कमजोर हो और उनके विरोधियों का स्वर मुखर हो। 

लगता यह भी है कि वे भी सुषमा स्वराज और अन्य नेताओं की तरह ही मोदी-शाह मानकों पर आगे चलने को राजी हो गए हैं। उनके भविष्य का तो पता नहीं लेकिन प्रदेश की राजनीति के लिए यह अच्छा संकेत नहीं है।

Jun 18, 2017

थानेदार कहता है, 'छेड़छाड़ के खिलाफ मुकदमा तब दर्ज होगा जब डब्बू भैया कहेंगे'

मोबाइल की वजह से हम तीनों मां—बेटियों की हालत ऐसी कर दी कि मोबाइल छूने से डर लगने लगता, हमें डर के मारे रातों में नींद नहीं आती। हमारी हालत पागलों जैसी हो गयी.....
जनज्वार, देवरिया। उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार और उनके लोग बेटियों के अधिकार और सम्मान बचाने में कितने तत्पर हैं, यह मामला उसका प्रतिनिधि उदाहरण है। आप भी यह रपट पढ़िए और सुनिए उस औरत की आवाज जिसकी बेटियां छेड़ी जा रही हैं और मुकदमा भी उसी के परिवार वालों के खिलाफ दर्ज हो जा रहा है, क्योंकि हिंदू युवा वाहिनी के नेता दीपक सिंह उर्फ डब्बू भैया यही चाहते हैं।

हिंदी सिनेमा और भारतीय समाज की असलियत का बड़ा मेल है। जैसे सिनेमा में कोई एक ईलाकाई गुंडा सरीखा नेता अधिकारियों से चरण—चाटन कराता है, कुछ ऐसा ही मामला देवरिया के मदनपुर थाने का सामने आया है।
पीड़िता के परिजनों ने जब मदनपुर थाने के थानाधिकारी प्रभात श्रीवास्तव से गुहार लगाई तो एसओ साहब ने दो टूक कहा, 'डब्बू भैया ने कहा तो तुम्हारे लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो गया, वह कहेंगे तो तुम्हारी तरफ से भी दर्ज कर देंगे।' हालांकि दो दिन पहले एसओ प्रभात श्रीवास्तव का ट्रांसफर देवरिया हो गया है लेकिन एसओ साहब ने न सिर्फ पीड़िता के परिजनों की नहीं सुनी, बल्कि अतिरिक्त पुलिस अधिक्षक और पुलिस अधिक्षक के कहने के बावजूद मुकदमा नहीं दर्ज किया। एसओ श्रीवास्तव कहते रहे, 'तफ्शीश हो रही है साहब।'
मदनपुर थानाक्षेत्र के बरडीहा दल गांव में नूरतमा अपनी दो बेटियों के साथ रहती हैं। नूरतमा का परिवार भूमिहीन है और उनके पति रोजी—रोटी के लिए देश से बाहर अरब में मजदूरी करते हैं। गांव में कुल 600 से उपर घर हैं जिसमें से 60 घर मुसलमानों के हैं। ऐसे में हिंदुओं का दबदबा है। बरडीहा गांव के मौजूदा ग्राम प्रधान गोविंद निषाद कहते हैं, 'डब्बू बाबू के हस्तक्षेप के कारण लड़कियों के साथ हुआ अपराध हिंदू बनाम मुसलमान हो गया। क्या बेटियों की इज्जत और आबरू जाति देखकर बचायी जाएगी। हमने सभी अधिकारियों से दरख्वास्त कर ली लेकिन मुकदमा नहीं दर्ज हुआ।'
मामला कहां से शुरू हुआ, इस बारे में नूरतमा बताती हैं कि मेरे पास एक मोबाइल है। उस पर अक्सर कोई फोन करके चुप हो जाता था। लेकिन जैसी ही मैं मोबाइल बेटियों को देती वह अश्लील बातें करने लगता, गालियां और धमकियां देता। उसने मोबाइल की वजह से हम तीनों मां—बेटियों की हालत ऐसी कर दी कि मोबाइल छूने से डर लगने लगता, हमें डर के मारे रातों में नींद नहीं आती। हमारी हालत पागलों जैसी हो गयी।
फिर मेरे विकलांग भसूर के पता चला। उनके बेटे ने फोन मिलाया तो पता चला कि गांव के ही हरिजन जाति का एक लड़का विजय फोन कर तंग करता है। उसके साथ दूसरे लड़के भी शामिल हैं। हमने मना किया तो वह गाली—गलौच पर उतर आए। मुझसे मारपीट की। बात में मैं मोबाईल छीनकर साथ ले आई तो वह हमें मारने घर आ गए, बेटियों से बदतमीजी का प्रयास किया।
फोन करने वालों की ओर से दर्जनों लोग हमारे घर पर चढ़ आए। दोनों से मारपीट हुई। नूरतमा के भसुर बताते हैं, 'फोन पर बदतमीजी करने वाले लड़के हिंदू युवा वाहिनी से जुड़े हैं। हम थाने गए तो हमारे ही 13 लोगों के यानी मुस्लिमों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया। एसओ ने कहा, 'डब्बू भैया बीच में हैं, जबतक वह कहेंगे नहीं करेंगे। मामला हिंदू मुसलमान का नहीं बनाना है।'
जनज्वार ने हिंदू युवा वाहिनी के नेता डब्बू भैया उर्फ दीपक सिंह संपर्क करने का प्रयास किया पर बातचीत नहीं हो सकी। दो दिन पहले आए नए थानेदार ज्ञान प्रताप पाठक ने जरूर कहा कि मैंने पीड़ितों को सूचित कर दिया है कि वह एक बार आकर मिलें।
पर नूरतमा का सवाल यह है कि जब एसएसपी के कहने पर मुकदमा दर्ज नहीं हुआ तो थानेदार क्या कर पाएंगे?
पंचायत प्रतिनिध संघ के पदाधिकारी चतुरानन ओझा का कहना है, 'सरकार बदलने के बाद अपराध की गंभीरता की पहचान धर्म देखकर की जाने लगी है, यह लोकतंत्र के लिए एक खतरनाक स्थिति है। इस प्रवृत्ति पर और हिंदू युवा वाहिनी के लोगों के कानून व्यवस्था से उपर होते जाने को अगर समय रहते नहीं रोका गया तो राज्य की स्थितियां भयावह हो जाएंगी।'