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Mar 6, 2011

छात्र योगेश के परिजनों को हत्या का संदेह, जांच की मांग



जनज्वार टीम. पंजाब के नवाशहर स्थित आइआइटीटी कॉलेज से बीटेक कर रहे छात्र योगेश रंजन की लाश आज सुबह उसके पैतृक घर बिहार के नवादा जिले के बहादुरपुर गाँव  पहुंची है। आत्महत्या के तीन बाद पहुंची लाश को देख परिजन गहरे शोक  में हैं और मान रहे हैं कि यह आत्महत्या का नहीं, हत्या का मामला है।

योगेश रंजन के चाचा राम किंकर पांडेय ने कहा कि,‘अगर योगेश ने पंखे से लटककर आत्महत्या की है तो उसकी गर्दन पर निशान क्यों नहीं है। इसलिए हमलोग हत्या की जांच की मांग करते हैं और इसके लिए हमने स्थानीय सांसद डॉक्टर भोला सिंह से संपर्क भी किया है कि वे संसद में योगेश मामले के जांच की मांग करें।’ परिजनों के मुताबिक चूंकि लाश सड़ रही थी इसलिए उसका दुबारा पोस्टमार्टम कराना संभव नहीं था। गौरतलब है कि 4मार्च को योगेश की आत्महत्या का मामला उस समय सामने आया था जब रात बजे उसके दोस्त उससे मिलने गये थे।

योगेश की लाश गांव पहुंचने के बाद यह विवाद गहराने लगा है कि उसने आत्महत्या की थी,या हत्या है। प्रथम वर्ष के प्रथम सेमेस्टर के छात्र योगेश ने आत्महत्या रिजल्ट आने के तीन घंटे बाद की थी। इसलिए स्वाभाविक तौर पर यही माना जा रहा है कि आत्महत्या के पीछे खराब परीक्षा परिणाम का सदमा ही रहा हागा। लेकिन योगेश के साथी एक दूसरा सवाल उठाते हैं कि यहां की परिस्थितियां भी ऐसी हैं कि छात्र या तो भाग जाये नहीं तो आत्महत्या कर लें।

बीटेक कर रहे एक दूसरे वर्ष के छात्र ने बताया कि ‘छात्रों को फेल कराना यहां एक चलन है। इससे निजी शिक्षा संस्थानों का मुनाफा बढ़ता है। अगर ऐसा नहीं है तो इन्हें कॉलेज बंद कर देना चाहिए क्योंकि बीटेक प्रथम वर्ष के प्रथम सेमेस्टर में पढ़ने वाले 150 छात्रों में 98 फीसदी छात्र किसी न किसी विषय में फेल हैं। ऐसे में जो छात्र सच में मेधावी होगा और परिवार वाले एक-एक पैसा जोड़ उसे पढ़ा रहे होंगे तो वह मरेगा नहीं तो क्या करेगा।’

योगेश के आत्महत्या के बाद भी प्रबंधन का रवैया किसी शिक्षा संस्थान का नहीं,दुकान का रहा। कॉलेज के प्रिंसिपल, निदेशक उसे देखने तक नहीं आये।