Jan 26, 2011

नेताजी को अब वह चरित्रहीन लगती है !


बिहार में किसी महिला का विधायक से बदला लेने की ये पहली घटना नहीं  है। इसके पहले योगेन्द्र सरदार नाम के विधायक  ने जब एक महिला से जबरदस्ती की तो उस साहसी महिला ने महोदय का गुप्तांग  काट लिया था...

निखिल आनंद

बिहार में  पुर्णिया के बीजेपी  विधायक राजकिशोर केसरी चौथी बार विधायक बने थे। रुपम पाठक नाम की एक एमए  पास शिक्षिका ने विधायक पर यौन शोषण के इल्जाम में विधायक केसरी की छुरामार कर हत्या कर दी। पुरूष वर्चस्व वाले समाज में वाकई ये आश्चर्य की बात है कि अब तक की परंपरा के अनुसार एक निरीह अकेली महिला के साथ पुरुष ज्यादती करता था । पर इस घटना में एक महिला ने एक जनप्रतिनिधि की यौन शोषण बदला लेने के लिए हत्या कर दी है। महिला ने विधायक की हत्या की इसकी जितनी निंदा की जाय कम है और कानून उसके किये की सजा भी अवश्य देगा ।

रूपम पाठक : किये पर मलाल नहीं
 राजकिशोर केसरी पर लगाये आरोप सही थे या गलत ये भी जाँच का विषय है क्योंकि महिला के लगाये गए आरोप विधानसभा के सदस्य की गरिमा और मर्यादा के लिहाज़ से अत्यंत गंभीर हैं। लेकिन इस घटना से सहज ही समझ सकते हैं कि उक्त महिला के भीतर प्रतिशोध की ज्वाला किस कदर भड़की हुई थी।

 इस पूरी घटना ने एन.चन्द्रा की एक फिल्म - प्रतिघात-का वो अंतिम दृश्य आँखों के सामने घुमा दिया जिसमें फिल्म की हिरोइन ने अपने अत्याचार का प्रतिशोध लिया था। बिहार में किसी महिला का विधायक से बदला लेने की ये पहली घटना नही है। इसके पहले भी -योगेन्द्र सरदार-नाम के विधायक  जी ने जब एक महिला को गलत काम के लिए बाध्य करने की कोशिश की तो उस साहसी महिला ने महोदय का गुप्त अंग काट लिया था।

पुर्णिया के बी.जे.पी.विधायक राजकिशोर केसरी की हत्या से बी.जे.पी.जितनी दुखी है उससे ज्यादा कहीं सुशील कुमार मोदी को आघात पहुँचा है। यही कारण है कि केशरी की हत्या के बाद मोदीजी मिडिया के सामने अपने विधायक का चरित्र चित्रण करने में जुटे रहे। उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने मिडिया से कहा कि राजकिशोर केशरी इमानदार, कर्मठ, जुझारू नेता थे । वहीँ मोदी ने ये भी कहा की महिला ब्लैकमेलर थी यानी गलत थी,इशारा साफ़ था की चरित्रहीन है ।

एक जिम्मेदार पद पर बैठे नेता का बयान कई सवाल खड़ा करता है. पहली बात तो ये की किसी के चरित्र की कोई ठेकेदारी नहीं ले सकता है l सच क्या है वो जांच के विषय हैं, कई बिन्दुयों पर जांच होनी चाहिए - रूपम और राज किशोर केसरी के बीच क्या सम्बन्ध थे ? रूपम विधायक को ब्लैकमेल कर रही थी लेकिन क्यों ? क्या ये सच है की विधायक और उनके सहयोगी विपिन राय रूपम का ब्लैकमेलिंग कर यौन शोषण कर रहे थे ? क्या ये बात सच है की रूपम के बाद उसकी बेटी पर बुरी नज़र रखी जा रही थी ? अब जहाँ तक महिला के चरित्रहीन होने की बात है तो क़ानून ये कहता है की पत्नी के साथ पति का या किसी यौन कर्मी  के साथ किसी भी व्यक्ति का जबरदस्ती शारीरिक सम्बन्ध स्थापित करना- ये सभी बलात्कार की श्रेणी में आता है .

एसोसियेशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म के आंकड़े के अनुसार जो 142विधायक इस बार की विधानसभा में दागी है और इनमें 85 पर गंभीर आरोप हैं l ए.डी.आर. की इस लिस्ट में राजकिशोर केसरी भी शामिल थे और उनपर आई.पी.सी. की धारा- 323, 353, 307, 147, 148, 149, 308, 379, 504, 452 और 426 के तहत मामले दर्ज थे । राज्य के मुखिया नीतीश कुमार के भ्रष्ट्राचार के खिलाफ अभियान और क़ानून-व्यवस्था के दावे पर भी जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों से बट्टा लग रहा है.
मारे गए विधायक राजकिशोर : हत्या नहीं विकल्पहीनता   
सरकार बनने के डेढ़ महीने में ही बीमा भारती,हुलास पाण्डेय,सुनील पाण्डेय और अब राजकिशोर केसरी से जुड़े मामले सुर्खियाँ बन चुके है. नीतीश ज़ी की कोशिश भी है की सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता बरती जाय .  इस सन्दर्भ में जनप्रतिनिधियों और उनके नजदीकियों से जुड़े मामले का स्पीडी ट्रायल भी एक विचारणीय मुद्दा है.

अफसोस की केसरीजी जनप्रतिनिधि थे और उनकी हत्या हो गई,लेकिन सरकार के सुशासन के दावे के बीच ये घटना सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलता है यानि जब जनप्रतिनिधि सुरक्षित नही है तो आम जनता की कौन पूछे। फिर ये नीतीश बाबू की सरकार बनने के बाद ये विधायकों के साथ हुआ दूसरा मामला है।

इससे पहले बीमा भारती पर उनके क्रिमिनल पति अवधेश मंडल ने अपहरण कर अवैध कब्जे में लेकर जान से मारने की कोशिश की थी । फिर सवाल महिलाओं के खिलाफ राज्य में हो रहे उत्पीड़न और समय रहते न्याय न मिल पाने का का भी है। लेकिन बिहार की राजनीतिक सर्किल में सनसनीखेज और चर्चित सेक्स स्कैंडल की लिस्ट में श्वेत निशा उर्फ़ बाबी, चंपा विश्वास, शिल्पी-गौतम, रेशमा उर्फ़ काजल के बाद अब "रूपम पाठक- राजकिशोर केसरी" का भी नाम जुड़ गया है .

 इन सभी मामलों की परिणति क्या हुई ये किसी से छुपी हुई नहीं है और अभी तक केसरी हत्याकांड में जो प्रगति है उससे इस मामले के हश्र की तरफ एक इशारा मिल गया है .डी.आई.ज़ी ने कहा की हम हत्याकांड को केंद्र में रखकर पूरे मामले की जांच कर रहे है जबकि ये पूरा मामला सेक्स स्कैंडल का है जिसमें सही जांच की दिशा कुछ बड़े गिरेबान तक पहुँच सकते है .दूसरा की इस मामले का सबसे पहले खुलासा करने वाले 'Quisling' अंग्रेजी साप्ताहिक पत्रिका के संपादक नवलेश पाठक को पुलिस उनके घर से बिना नोटिस के घसीटते हुए ले गयी है.

सुशील मोदी: लीपापोती की कोशिश

 फिलहाल पत्रकार बिरादरी ने चुप्पी साधी हुई है जो वाकई आश्चर्य का विषय है .इस घटना से एक बार फिर स्पष्ट है की जनप्रतिनिधियों के चाल- चरित्र- और चेहरे दागदार है या बहस का मुद्दा है .यही कारण है की सार्वजनिक लोगो की निजी जिंदगी में लोगो की खासी दिलचस्पी हमेशा से रही है पर कई बार जब बड़ी घटना होती है तो वो मिडिया की सुर्खिया भी बन जाता है l

रूपम के साथ क्या हुआ ये जाँच का विषय है। इस पूरी घटना पर सही-गलत का फैसला मोदी या मिडिया के कहने से नही होगा। इस पूरे मामले में उच्चस्तरीय जाँच ही दूध-का-दूध और पानी-का-पानी स्पष्ट करेगा। तब तक राजकिशोर केसरी या रूपम पाठक-दोनों में से किसी का भी चरित्र चित्रण, चरित्र हनन और महिमामंडन नहीं होना चाहिए।  पूर्णिया की गलियों में खामोश घूम रही जनता सब जानती है और फैसला क़ानून के हाथ में है,जिसके लिए वाकई इंतज़ार करना होगा।


(निखिल आनंद   'इंडिया न्‍यूज बिहार' के पॉलिटिकल एडिटर हैं, उनसे  nikhil.anand20@gmail  पर  संपर्क किया जा सकता है.)


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