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Jun 18, 2017

थानेदार कहता है, 'छेड़छाड़ के खिलाफ मुकदमा तब दर्ज होगा जब डब्बू भैया कहेंगे'

मोबाइल की वजह से हम तीनों मां—बेटियों की हालत ऐसी कर दी कि मोबाइल छूने से डर लगने लगता, हमें डर के मारे रातों में नींद नहीं आती। हमारी हालत पागलों जैसी हो गयी.....
जनज्वार, देवरिया। उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार और उनके लोग बेटियों के अधिकार और सम्मान बचाने में कितने तत्पर हैं, यह मामला उसका प्रतिनिधि उदाहरण है। आप भी यह रपट पढ़िए और सुनिए उस औरत की आवाज जिसकी बेटियां छेड़ी जा रही हैं और मुकदमा भी उसी के परिवार वालों के खिलाफ दर्ज हो जा रहा है, क्योंकि हिंदू युवा वाहिनी के नेता दीपक सिंह उर्फ डब्बू भैया यही चाहते हैं।

हिंदी सिनेमा और भारतीय समाज की असलियत का बड़ा मेल है। जैसे सिनेमा में कोई एक ईलाकाई गुंडा सरीखा नेता अधिकारियों से चरण—चाटन कराता है, कुछ ऐसा ही मामला देवरिया के मदनपुर थाने का सामने आया है।
पीड़िता के परिजनों ने जब मदनपुर थाने के थानाधिकारी प्रभात श्रीवास्तव से गुहार लगाई तो एसओ साहब ने दो टूक कहा, 'डब्बू भैया ने कहा तो तुम्हारे लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो गया, वह कहेंगे तो तुम्हारी तरफ से भी दर्ज कर देंगे।' हालांकि दो दिन पहले एसओ प्रभात श्रीवास्तव का ट्रांसफर देवरिया हो गया है लेकिन एसओ साहब ने न सिर्फ पीड़िता के परिजनों की नहीं सुनी, बल्कि अतिरिक्त पुलिस अधिक्षक और पुलिस अधिक्षक के कहने के बावजूद मुकदमा नहीं दर्ज किया। एसओ श्रीवास्तव कहते रहे, 'तफ्शीश हो रही है साहब।'
मदनपुर थानाक्षेत्र के बरडीहा दल गांव में नूरतमा अपनी दो बेटियों के साथ रहती हैं। नूरतमा का परिवार भूमिहीन है और उनके पति रोजी—रोटी के लिए देश से बाहर अरब में मजदूरी करते हैं। गांव में कुल 600 से उपर घर हैं जिसमें से 60 घर मुसलमानों के हैं। ऐसे में हिंदुओं का दबदबा है। बरडीहा गांव के मौजूदा ग्राम प्रधान गोविंद निषाद कहते हैं, 'डब्बू बाबू के हस्तक्षेप के कारण लड़कियों के साथ हुआ अपराध हिंदू बनाम मुसलमान हो गया। क्या बेटियों की इज्जत और आबरू जाति देखकर बचायी जाएगी। हमने सभी अधिकारियों से दरख्वास्त कर ली लेकिन मुकदमा नहीं दर्ज हुआ।'
मामला कहां से शुरू हुआ, इस बारे में नूरतमा बताती हैं कि मेरे पास एक मोबाइल है। उस पर अक्सर कोई फोन करके चुप हो जाता था। लेकिन जैसी ही मैं मोबाइल बेटियों को देती वह अश्लील बातें करने लगता, गालियां और धमकियां देता। उसने मोबाइल की वजह से हम तीनों मां—बेटियों की हालत ऐसी कर दी कि मोबाइल छूने से डर लगने लगता, हमें डर के मारे रातों में नींद नहीं आती। हमारी हालत पागलों जैसी हो गयी।
फिर मेरे विकलांग भसूर के पता चला। उनके बेटे ने फोन मिलाया तो पता चला कि गांव के ही हरिजन जाति का एक लड़का विजय फोन कर तंग करता है। उसके साथ दूसरे लड़के भी शामिल हैं। हमने मना किया तो वह गाली—गलौच पर उतर आए। मुझसे मारपीट की। बात में मैं मोबाईल छीनकर साथ ले आई तो वह हमें मारने घर आ गए, बेटियों से बदतमीजी का प्रयास किया।
फोन करने वालों की ओर से दर्जनों लोग हमारे घर पर चढ़ आए। दोनों से मारपीट हुई। नूरतमा के भसुर बताते हैं, 'फोन पर बदतमीजी करने वाले लड़के हिंदू युवा वाहिनी से जुड़े हैं। हम थाने गए तो हमारे ही 13 लोगों के यानी मुस्लिमों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया। एसओ ने कहा, 'डब्बू भैया बीच में हैं, जबतक वह कहेंगे नहीं करेंगे। मामला हिंदू मुसलमान का नहीं बनाना है।'
जनज्वार ने हिंदू युवा वाहिनी के नेता डब्बू भैया उर्फ दीपक सिंह संपर्क करने का प्रयास किया पर बातचीत नहीं हो सकी। दो दिन पहले आए नए थानेदार ज्ञान प्रताप पाठक ने जरूर कहा कि मैंने पीड़ितों को सूचित कर दिया है कि वह एक बार आकर मिलें।
पर नूरतमा का सवाल यह है कि जब एसएसपी के कहने पर मुकदमा दर्ज नहीं हुआ तो थानेदार क्या कर पाएंगे?
पंचायत प्रतिनिध संघ के पदाधिकारी चतुरानन ओझा का कहना है, 'सरकार बदलने के बाद अपराध की गंभीरता की पहचान धर्म देखकर की जाने लगी है, यह लोकतंत्र के लिए एक खतरनाक स्थिति है। इस प्रवृत्ति पर और हिंदू युवा वाहिनी के लोगों के कानून व्यवस्था से उपर होते जाने को अगर समय रहते नहीं रोका गया तो राज्य की स्थितियां भयावह हो जाएंगी।'

Apr 27, 2017

रमेश लोधी की हत्या में आपकी पुलिस किसे बचा रही है योगी जी!

लाश लावारिश थी तो उसकी शिनाख्त करने के लिए उन पर इतना जोर क्यों था. शवदाह की जल्दी क्यों थी. लाश को घर ले जाने में पुलिस को क्या और कैसी हिचक थी. गांव स्थित श्मशान में शवदाह क्यों नहीं हो सकता था.....

रमेश लोधी की संदिग्ध हालात में हुई मौत पर परिजनों से पूछताछ करता जांच दल
नन्हे पहलवान नहीं रहे. वह लखनऊ के इंदिरा नगर इलाके के गांव मजरे फतहापुरवा के निवासी थे. वह मामूली आदमी थे लेकिन उनकी मौत की खबर इसलिए ख़ास है क्योंकि वह उस रमेश लोधी के चाचा थे जिसकी पिछली 7 अप्रैल को रहस्यमय तरीके से मौत हुई थी। वही इस मामले के प्रमुख पैरोकार भी थे. नन्हे स्वाभाविक मौत नहीं मरे. पुलिस ने पहले उनका भतीजा छीना और फिर इंसाफ मांगने पर उनका जीना मुहाल कर दिया। ख़ास बात यह भी कि उन्होंने उन चार लोगों को बेकसूर माना था जिन्हें पुलिस ने उनके भतीजे रमेश की हत्या के मामले के आरोपी के बतौर जेल भिजवा दिया.  

यह मामला मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी की कानून व्यवस्था दुरुस्त करने की घोषणा को भी ठेंगा दिखाती है, क्योंकि योगी ने इसे अपनी सरकारी की प्राथमिकताओं में शुमार किया है। यह उल्लेख भी ज़रूरी है कि नन्हे पहलवान ने अपने भतीजे की हत्या के मामले में एसएसपी समेत मुख्यमंत्री के जनता दरबार में भी इंसाफ की गुहार लगायी थी, लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिला।    
         
इंसानी बिरादरी, रिहाई मंच और इंसाफ अभियान संगठनों से जुड़े लोगों ने इस पूरे मामले की छानबीन एक जांच दल के जरिए की, जिसके नतीजे पुलिस को ही कटघरे में खड़ा करते हैं. जांच दल के मु​ताबिक भतीजे की पुलिस हिरासत में हुई मौत ने नन्हे पहलवान को बुरी तरह झकझोर दिया था. घरवालों की मर्जी के खिलाफ पुलिस उसका शव पोस्टमार्टम हाउस से सीधे भैंसाकुंड ले गयी थी, जहां विद्युत शव गृह में उसे फूंक दिया गया. घरवाले चाहते थे कि शव पहले उनके गांव ले जाया जाये लेकिन पुलिस ने उनकी एक न सुनी. 

रमेश लोधी की मौत शक के घेरे में है. उसकी हत्या के आरोप में जेल में बंद लोगों के परिजनों और पड़ोसियों के मुताबिक़ 6-7 अप्रैल की रात कोई सवा बजे इंदिरा नगर के दायरे में शामिल हो चुके चांदन गांव के सुनसान कोने में स्थित कय्यूम के घर चोर घुसा था. आहट से घरवालों की नींद टूट गयी, शोर से पड़ोसी भी जाग गये और रमेश लोधी पकड़ा गया. उसकी थोड़ी बहुत पिटाई हुई और 100 नंबर पर उसके पकड़े जाने की सूचना दे दी गयी.

पुलिस घटनास्थल पर पहुंची, लेकिन उसने पानी-मिट्टी से सने चोर को अपने वाहन में बिठाने से परहेज किया और चोर को गोमती नगर थाना पहुंचाने की जिम्मेदारी कय्यूम और उसके पड़ोसी अकील पर लाद दी. मोटरसाइकिल पर दोनों के बीच चोर बैठा. पड़ोसी होने के नाते दूसरी मोटरसाइकिल से इरफान और बबलू भी साथ हो लिये. रात ढाई बजे तक चारों अपने घर वापस भी लौट आये. यही चारों बाद में रमेश के हत्यारोपी बना दिये गये. चारों गरीब परिवार से हैं और अपने घरों के मुखिया भी हैं. उनके जेल चले जाने के चलते उनके परिवार भीषण तंगी से गुजर रहे हैं.

पुलिस कहती है कि उसने चोर को अपने कब्जे में लिया था, लेकिन वह उसकी पकड़ से भाग निकला. उसे बहुत खोजा गया लेकिन वह हाथ न आया. दूसरे दिन सुबह तकरोही से सटी मायावती कालोनी के पास लावारिस लाश मिली. 100 नंबर पर इसकी सूचना मिलने पर पुलिस आयी और उसे मेडिकल कालेज ले कर चली गयी. उसे लावारिश घोषित कर दिया गया.

नन्हे पहलवान कहते रहे कि रात कोई 3.30 बजे पुलिस उनके घर आयी थी और उनसे रमेश लोधी के बारे में पूछताछ की थी. लेकिन यह नहीं बताया कि आखिर इतनी रात में की जा रही पूछताछ के पीछे माजरा क्या है. अगले दिन यानी 7 अप्रैल को कोई 11.30 बजे पुलिस फिर गांव आयी और उनसे मोबाइल पर एक धुंधली सी तसवीर पहचानने को कहा. नन्हे पहलवान और फिर रमेश की मां सताना समेत घर के दूसरे सदस्यों और पड़ोसियों ने भी उस तसवीर को नहीं पहचाना, तो भी पुलिस ने नन्हे पहलवान पर पोस्टमार्टम हाउस चलकर लाश की पहचान करने का दबाव बनाया.

नन्हे पहलवान ने लाश को देखते ही उसकी पहचान अपने भतीजे के तौर पर कर दी. इसके बाद पुलिस ने रहस्यमयी मुस्तैदी दिखायी और लाश को फ़टाफ़ट फुंकवा दिया. इस बीच सूचना पाकर रमेश की बहन बिंदेश्वरी सीधे भैंसाकुंड पहुंची थी और उसने लाश को गांव ले जाने की ज़िद पकड़ी। उसने पुलिस की इस जल्दबाजी के पीछे किसी साजिश की आशंका भी जतायी, लेकिन उनकी आवाज अनसुनी कर दी गयी. 

शवदाह के समय मौजूद लोगों ने कुछेक पुलिसवालों को फोन पर किसी को कुछ ऐसा भरोसा दिलाते हुए सुना कि सब ठीक हो जायेगा सर, कि काम पूरा हो गया सर. शव दाह के फ़ौरन बाद पुलिस नन्हे पहलवान को थाने पर पहुंचने का आदेश देकर चलती बनी. थाने में समझौते की बात चल रही थी और उनसे किसी कागज़ पर अंगूठे का निशान लिया जाना था. इस बीच वह दवा लेने बाहर निकले. इस बहाने उन्होंने किसी वकील से संपर्क साधा और उसकी सलाह पर वापस थाने जाने के बजाय सीधे अपने घर चले गये.

इसके बाद पुलिस कैलाश लोधी के पीछे पड़ गयी जो नन्हे थाने से मेडिकल की दुकान तक ले गये थे. पुलिस को लगा कि नन्हे पहलवान के थाना वापस न लौटने के पीछे कैलाश लोधी का हाथ है. पुलिस ने उन्हें धमकाया, लगातार उनका फोन घनघनाया और रिस्पांस न मिलने पर उनके घर भी धमक गयी. उन्हें भी डर है कि पुलिस उन्हें कभी भी फंसा सकती है.

इस डर की छाया नन्हे पहलवान की अंतिम यात्रा के दौरान भी दिखी. इस मामले पर सबने जैसे खामोशी ओढ़ रखी थी. एक नौजवान के मुताबिक सुबह नन्हे पहलवान बहुत उदास थे और कह रहे थे कि अब कुछ नहीं होनेवाला. पुलिस बच निकलेगी और चार लोग पुलिस के गुनाह की सजा भुगतेंगे, उन बेचारों के घर बर्बाद हो जायेंगे. 

ढेरों सवाल हैं. लोगों का बयान है कि चोर को थाने ले जाया गया था. क्यों न माना जाये कि थाने में उसकी बेरहम पिटाई हुई जिससे वह लाश में बदल गया. खुद को बचाने के लिए पुलिस ने उसकी लाश सड़क किनारे फेंक दी और फिर लावारिश लाश की बरामदगी दिखा दी. तो फिर पुलिस देर रात नन्हे पहलवान के घर रमेश लोधी के बारे में पूछताछ करने क्यों और किस आधार पर गयी थी. 

सवाल यह भी कि लाश लावारिश थी तो उसकी शिनाख्त करने के लिए उन पर इतना जोर क्यों था. शवदाह की जल्दी क्यों थी. लाश को घर ले जाने में पुलिस को क्या और कैसी हिचक थी. गांव स्थित श्मशान में शवदाह क्यों नहीं हो सकता था. यह झूठी बात क्यों फैलायी गयी कि रमेश शादीशुदा था, कि उसकी पत्नी उसकी इन्हीं आदतों के चलते छह माह पहले उसे छोड़कर जा चुकी थी. जबकि रमेश अविवाहित था और हिंदू समाज में अविवाहित को जलाने की नहीं, दफनाये जाने की परंपरा रही है. तो क्या शवदाह और उसमें जल्दबाजी के पीछे पुलिस की मंशा अपने गुनाहों के सबूत मिटाने की थी. पुलिस किस बात का समझौता कराना चाहती थी और क्यों. नन्हे पहलवान के हमदर्दों के खिलाफ पुलिस ने निशाना क्यों साधा. ऐसा माहौल क्यों बनाया कि लोग चुप रहें, कि इसी में अपनी भलाई समझें.

जांच दल ने मांग की है कि मुख्यमंत्री और एसएसपी को भेजी गयी नन्हे पहलवान की अर्जी के मुताबिक़ फ़ौरन कार्रवाई हो और पुलिस की भूमिका की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए जाएं. जांच दल में इंसानी बिरादरी के आदियोग और वीरेंद्र कुमार गुप्ता, रिहाई मंच के अध्यक्ष शोएब मोहम्मद, महासचिव राजीव यादव और अनिल यादव, इंसाफ अभियान की गुंजन सिंह, विनोद यादव और परवेज सिद्दीकी शामिल थे।

Apr 20, 2017

महिला अधिकारी के बेडरूम में घुसा बीजेपी वर्कर, योगी के मंत्री बोले अतिउत्साह में था कार्यकर्ता

समाजवादी सरकार में जब बलात्कार की घटना होती थी, तो मुखिया मुलायम सिंह यादव कह दिया करते थे कि बच्चों से ऐसी गलती हो जाया ​करती है। योगी युग में भी बदजुबानी के बोल बदले नहीं हैं, अब उनके मंत्री कहते हैं कि कार्यकर्ताओं से एक्साइटमेंट में गलतियां हो जाया करती हैं....

मंत्री से शिकायत करतीं  बीडीओ
उत्तर प्रदेश के महोबा स्थित जैतपुर ब्लॉक की बीडीओ ने बीजेपी नेता पर बेडरूम में घुसकर बदसलूकी करने का आरोप लगाया है। बीडीओ महिमा विद्यार्थी ने बीजेपी के सेक्टर प्रभारी असमेन्द्र द्विवेदी द्वारा की गयी इस बदसलूकी की शिकायत राज्यमंत्री डॉ. महेंद्र सिंह से की, तो उन्होंने इसे अति उत्साह में आकर की गयी घटना बताकर टालने की कोशिश की।  

जैतपुर में तैनात बीडीओ महिमा विद्यार्थी ने 19 अप्रैल को आरोप लगाया कि जब व​ह आॅफिस के बाद अपने सरकारी आवास पर थीं, तो बीजेपी के सेक्टर प्रभारी असमेन्द्र द्विवेदी जबरन उनके बैडरूम में घुस आए और उनके साथ बदसलूकी करने लगे। महिमा विद्यार्थी के मुताबिक इससे पहले भी बीजेपी नेता मेरे आवास पर आकर मेरे साथ बदसलूकी कर चुका है। मैंने उनसे कई बार ऑफिस में ही मिलने की बात कही, लेकिन वो जबरदस्ती घर में आ जाते हैं और काम करवाने के नाम पर अभद्रता करते हैं।"

महिमा के मुताबिक उन्होंने इस बदसलूकी की शिकायत कुलपहाड़ कोतवाली में की, लेकिन पुलिस ने कार्रवाई तो दूर, उनकी शिकायत दर्ज तक नहीं की। पुलिस ने मामला शांत करने की कोशिश की, लेकिन आरोपी के खिलाफ एक्शन नहीं लिया।

जब महिमा विद्यार्थी की शिकायत पुलिस ने दर्ज नहीं की तो 19 अप्रैल को वह जैतपुर ब्लॉक में आए राज्यमंत्री डॉ महेंद्र सिंह से मिलने पहुंचीं। उन्होंने बीजेपी कार्यकर्ता की शिकायत भी की, लेकिन मंत्री के जवाब ने उन्हें और परेशान कर दिया। मंत्री जी ने कहा- बीजेपी कार्यकर्ता कोई अमर्यादित कार्य नहीं करते। कुछ कार्यकर्ता अति उत्साहित होकर ऐसा कर देते हैं।

Mar 22, 2017

दलित लड़की का गैंगरेप, विरोध करने पर भाई की उंंगलियां काटीं

योगी जी की पुलिस पहले गैंगरेप के सबूत मिटाती है फिर चार दिन बाद ​मुकदमा दर्ज करती है


जनज्वार। मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठते ही एक्शन में आए योगी आदित्यनाथ के प्रदेश की स्थिति यह है कि वहां चार ब्राह्मण जाति के लड़के जीतू, बॉबी, रितेश और प्रवीण पहले एक नाबालिग दलित लड़की का गैंगरेप करते हैं, भाई द्वारा विरोध करने पर उसकी उंगलियां काटते हैं, पेट में चाकू से 10 बार से ज्यादा वार करते हैं, मरा हुआ जानकर छोड़ जाते हैं और पिता शिब्बू जब इन घटनाओं को बताने के लिए पुलिस को फोन करते हैं तो इलाके का एसएचओ पीड़िता के बाप को एक रात हवालात की हवा खिलाकर कुटाई करता है कि तुम अपना केस वापस लो, मासूम लड़कों को बलात्कार जैसे संगीन आरोप में न फंसाओ, उनकी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी। 

और जब पिता ऐसा नहीं करता है तो आरोपियों के परिजन 17 वर्षीय नाबालिग पीड़िता के पिता के घर की छत में छेद करते हैं, उसे बाहर निकालते हैं, दम भर कु​टाई करते हैं और फिर घर लूटकर फूंक देते हैं। जिसमें दो मोटरसाइकिलों समेत सबकुछ जलकर खाक हो जाता है। साथ ही आरोपियों के परिजन धमकाते हैं अब राज बदल गया है. भाजपा विधायक अनिल शर्मा भी हमारा, पुलिस भी  हमारी. इस बीच वाल्मिकी परिवार खेतों—खलिहानों के रास्ते भागते हुए बुलंदशहर जाकर अपनी जान बचाता है। लूटपाट, आगजनी और जान से मारने की कोशिश के मामले में  मनोज, मनोज की घरवाली, पंकज, मुकेश, मनीष, नीतू, सोनू, राधा शर्मा,  शिवदत्त, सत्ता, वीरेंद्र और सोमू पर मुकदमा दर्ज है। पर एक भी गिरफ्तारी अबतक नहीं हुई है।

जी, हां। यही हुआ है यूपी के बुलंदशहर जिला के थाना जहांगिराबाद के ​कटियावली गांव में। गांव में तीन घर वाल्मिकी और पूरा गांव ब्राह्मणों का है। 14 मार्च की शाम 7.30 बजे अपने घेर (घर से अलग थोड़ी दूर पर जहां जानवरों को पालते हैं) पर पीड़िता जानवरों को बांधकर लौटने की ही वाली थी कि चार ब्राह्मण जाति के लड़कों ने उसको दबोच कर गैंगरेप किया। रेप करने वाले चारों आरोपियों की उम्र 20 से 30 साल के बीच है। 

पीड़ित पक्ष के वकील रणवीर सिंह लोधी बताते हैं, '14 मार्च की घटना का मुकदमा 18 मार्च को दर्ज हुआ। जहांगीराबाद थाना प्रभारी श्यामवीर ​सिंह ने मुकदमा दर्ज करने की बजाए पीड़िता के पिता को ही हवालात में डाल दिया और मुकदमा नहीं लिखाने पर दबाव बनाने लगे। दो दिन बाद में जब ये लोग मेरे पास आए तो एसएसपी सोनिया सिंह के हस्तक्षेप पर धारा 376, एसएसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है। हालांकि अब तक चारों में से किसी आरोपी की गिरफ्तारी पुलिस नहीं कर सकी है। पुलिस ने यह जरूर किया है कि आरोपियों के साथ मिलकर ज्यादातर सबूत मिटा दिए हैं।'

मुकदमा दर्ज कराए जाने के बाद पीड़ित परिवार गांव लौटने की हिम्मत नहीं कर पा रहा। मगर सरकार की ओर से अब तक पीड़ित परिवार के लिए न तो रहने की कोई व्यवस्था, न सुरक्षा और न ही कोई आर्थिक मदद मिली है। पीड़िता के भाई को बुलंदशहर जिला अस्पताल से दिल्ली रेफर कर दिया गया है। वहां के डॉक्टरों ने बताया कि पीड़िता के भाई राजा की हालत नाजुक है, उसे बेहतर ईलाज की जरूरत है। 

गौरतलब है कि 14 मार्च की शाम पीड़िता की चीख सुन उसका भाई राजा उसको बचाने के लिए दौड़ा आया। भाई को देख चारों ने लड़की को छोड़ उस पर हमला कर दिया। दरिंदों ने बचाव करते भाई के हाथ की चार उंगलियां काट दीं और 10 बार से ज्यादा बार चाकू से वार किया। इस जघन्य वारदात की सूचना के लिए पीड़िता के पिता ने रात में कई बार पुलिस के 100 नंबर पर फोन किया पर कोई नहीं आया। पीड़िता के पिता शिब्बू अन्य रिेश्तेदारों के साथ बेटे को नजदीकी अस्पताल में ले गए। 

Nov 2, 2016

राजीव यादव पर हमले का वीडियो आया सामने, देखिए पुलिसिया गुंडई का नंगा नाच

आतंकवाद के नाम पर फर्जी गिरफ्तारियों और मुठभेड़ों को लेकर करीब 5 वर्षों से सक्रिय रिहाई मंच के महासचिव राजीव यादव और शकील कुरैशी इंकलाब जिंदाबाद का नारा लगाते रहे और पुलिस लात—घूसे और लाठियां बरसाती रही। 

इस संगठन के अध्यक्ष और लखनऊ हाईकोर्ट के वकील मोहम्मद सोएब ने पिछले वर्षों में दर्जनों ऐसे बेगुनाह युवाओं को जेलों से बाहर निकाला और बाइज्जत बरी कराया है, जिनको पुलिस ने फर्जी तरीके से आतंकवाद के नाम पर गिरफ्तार किया था। 

शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर उत्तर प्रदेश पुलिस का बर्बर हमला