Nov 6, 2016

जनज्वार 'पोस्टर श्रृंखला' आज से शुरू

शुरुआत पत्रकारिता के मूल्यों से  

आपको पसंद आए तो ​कीजिए साझा। 
जनपक्षधर पत्रकारिता की जिम्मेदारी किसी पूंजीपति के जिम्मे नहीं ठेली जा सकती।
लेना होगा हमें मोर्चा, संभालनी होगी देश के हर जनपक्षधर साक्षर को कलम, लिखनी होगी खबर, बनाना होगा वीडियो—आॅडियो
क्योंकि
अभी कहना बाकि है
हमारे बहरे हो चुके हुक्मरानों को सुनाना बाकि है


Nov 5, 2016

एनडीटीवी के बाद एक और चैनल को किया प्रतिबंधित

NDTV के बाद अब सरकार की उच्च स्तरीय समिति ने अपने फैसले को जायज ठहराते हुए असम के प्रमुख न्यूज चैनल न्यूज टाइम असम पर भी 9 नवम्बर को एक दिन की पाबंदी लगाने की सिफारिश की है। 2 नवंबर को जारी अपने आदेश में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने चैनल द्वारा से एक से अधिक बार कार्यक्रम नियमों का उल्लंघन करने पर यह कार्रवाई की है।  

सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने चैनल द्वारा एक खबर में नाबालिग घरेलू नौकर को जघन्यतम तरीके से प्रताड़ित किये जाने के मामले में उसकी पहचान सार्वजनिक कर देने का दोषी मानते हुए चैनल को एक दिन के लिए प्रतिबंधित कर दिया है। सरकार की उच्चस्तरीय समिति ने तर्क दिया है कि घरेलू नौकर के तौर पर काम कर रहे बच्चे की पहचान उजागर करने से उसकी गोपनीयता और गरिमा को ठेस पहुंची है।

दिलचस्प यह है कि सरकार ने चैनल को यह कारण बताओ नोटिस अक्तूबर 2013 में दिया था। मगर कार्रवाई अब की है जबकि NDTV को एक दिन के लिए प्रतिबंधित किये जाने के मामले में एडिटर्स गिल्ड, पत्रकार संगठनों, राजनीतिक पार्टियों और मीडिया माध्यमों ने बड़े स्तर पर विरोध दर्ज कराया है और सरकार की थूकम—फजीहत हुई है। 

गौरतलब है कि 'न्यूज टाइम असम' को सरकार पहले भी अन्य दो मामले में कारण बताओ नोटिस दे चुकी है।

सिमी फेक इनकाउंटर मामले में प्रदर्शन करने पर सामाजिक कार्यकर्ताओं को बिठाया थाने में

विनीत तिवारी
भोपाल एनकाउंटर मामले में इंदौर पुलिस ने निष्पक्ष जांच की मांग करने वाले इंदौर के सामाजिक कार्यकर्ताओं को पुलिस ने थाने में बिठाया। गौरतलब है कि इसी घटना का विरोध करने पर दो दिन पहले रिहाई मंच के महासचिव राजीव यादव पर पुलिस ने हमला किया था।

जानकारी के मुताबिक इंदौर में आज भोपाल एनकाउंटर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद मोहन माथुर  के आह्वान पर शाम 5 बजे रीगल चौराहे, इंदौर में मानव श्रृंखला बनाकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया जाना था। सुबह से ही पुलिस ने सीपीआई एम के ज़िला सचिव कॉमरेड कैलाश लिम्बोदिया को घर से उठा लिया और थाने ले जाकर समझाइश दी कि ये प्रदर्शन निरस्त कर दो। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्वक हम निष्पक्ष जांच की मांग करना चाहते हैं और करेंगे। उन्हें 3-4 घंटे थाने बिठाये रखा।

इसी तरह आनंद मोहन माथुर के पास भी पुलिस से संदेश आया जिसका उन्होंने भी कॉमरेड कैलाश की ही तरह का जवाब दिया। प्राप्त जानकारी के मुताबिक शाम 5 बजे आनंद मोहन माथुर के घर पर पहुंचे पुलिस वालों ने उन्हें अपने घर से निकलने ही नहीं दिया। जो लोग भी रीगल चौराहे पहुंचे, उन्हें डंडे वर्दी से लैस पुलिस वालों नेे डराया धमकाया और पुलिस की गाड़ी में बिठाकर कहीं ले गए। बड़ी संख्या में महिला पुलिस भी वहां तैनात की गयी थीं। वहाँ पहुंची कल्पना मेहता और जया मेहता को भी महिला पुलिस ने अपने साथ चलने के लिए कहा, जिन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस डंडे लेकर बड़ी तादाद में मौजूद है और प्रदर्शन के लिए आये हुए लोगों को धमकाकर थाने ले जा रही है। अभी अभी खबर मिली है कि गिरफ्तार किये अनेक लोगों को पुलिस तुकोगंज थाने लेकर गयी है।

न्याय की मांग करना भी मध्य प्रदेश में गुनाह की श्रेणी में आने लगा है और निष्पक्ष जाँच की मांग करने वालों को देशद्रोही कहा जा रहा है।  प्राप्त जानकारी के मुताबिक प्रदर्शन में शरीक होने पहुंचे सीपीआई के ज़िला सचिव कॉमरेड रुद्रपाल यादव, एटक के नेता कॉमरेड सोहनलाल शिंदे, सीपीएम के ज़िला सचिव कॉमरेड कैलाश लिम्बोदिया, कॉमरेड परेश टोकेकर और श्रमिक नेता श्यामसुन्दर यादव को भी पुलिस ने ज़बरदस्ती प्रदर्शन से रोका और उन्हें पुलिस के वाहन में बिठाकर कहीं ले जाया गया। इन लोगों के मोबाइल भी बंद आ रहे हैं।

पता चला है कि पुलिस ने दोपहर से ही बड़ी संख्या में सिविल ड्रेस में अपने लोग रीगल चौराहे पर तैनात कर रखे थे।  आनंद मोहन माथुर जी ने बताया कि उनके घर से निकलने के पहले ही करीब 100 पुलिस प्रशासन के लोग वहां पहिंच गए और उनके ड्राईवर से कार की चाबी ले ली। जब उन्होंने ऑटो से जाने के लिए घर के बाहर से ऑटो रिक्शा रोक तो पुलिस ने उसे भी डपटकर भगा दिया और उन्हें प्रदर्शन के लिए नहीं जाने दिया। यहां ये बताना मुनासिब होगा कि श्री आनंद मोहन माथुर की आयु 90 वर्ष से अधिक है।

दिल्ली! हम दिल से शर्मिंदा हैं


अब दिल्ली—एनसीआर की हालत देख रोना आ रहा है। पटाखों का धुआं इतना ज्यादा है सूरज तक नहीं दिख रहा। आंखों में जलन हो रही है, सांस लेने में दिक्कत हो रही है।

गलती हो गयी, बहुत बड़ी गलती हो गयी। हमसे भी और आपसे भी। शर्मिंदगी भी महससू हो रही है।

हम बॉर्डर पर पाकिस्तान को सबक सिखाने की लंबी—लंबी हांकते हैं पर अपने ही शहर को अपने ही हाथों से बर्बाद करते जा रहे हैं। हम किस मूंह से खुद को देशभक्त बोलें। बहुत शर्मिंदगी महससू हो रही है।

दोस्तों, इस शर्मिंदगी को अगले साल हम सबको नहीं भूलना है और आज ही संकल्प लेना है कि ​कभी जिंदगी में दीपावली पर प्रदूषण नहीं करेंगे।

फिर भी मन न माने तो एक बार छोटे बच्चों, बुढ़ी मांओं, सांस के मरीजों, एलर्जी ग्रस्त लोगों, पेट में पल रहे बच्चों की परेशानी को याद कर लीजिए, आप अपना संकल्प कभी नहीं भूलेंगे और न ही हमें भूलने देंगे।

Nov 4, 2016

एनडीटीवी को लेकर वायरल हो रहा है यह प्रस्ताव, सहमत हों तो कीजिए शेयर


हम देशवासी एनडीटीवी पर थोपे गए 9 नवंबर के प्रतिबंध के खिलाफ हैं और इस बात से सहमत हैं कि एनडीटीवी अन्य सामाचार चैनलों से बेहतर, तार्किक और सही खबरें देता है। हम करोड़ों दर्शकों की मांग है कि सरकार अपने इस तानाशाही पूर्ण फैसले को तत्काल वापस ले और ब्रॉडकास्टिंग मिनिस्ट्री को सख्त हिदायत दे कि वह पूर्वग्रह​ ग्रसित और राजनीति परस्त कार्रवाही से भ​विष्य में बाज आए। 
सरकार अगर ऐसा नहीं करती है तो 
हम करोड़ो देशवासी आज फैसला लेते हैं कि एनडीटीवी को प्रतिबंधित किए जाने के दिन 9 नवंबर को देश का कोर्इ चैनल नहीं देखेंगे, अपनी टीवी नहीं खोलेंगे।  

दोस्तो, ध्यान रखिए आज आप नहीं खड़े होंगे तो कल कोई डटकर मुकाबला करने वाला नहीं बचेगा।   

Nov 3, 2016

धज्जियां रोज उड़ती हैं तो एनडीटीवी ही क्यों


सरकार ने कानून-उल्लंघन के लिये दंडित करने का फैसला भी किया तो हिन्दी के एक अपेक्षाकृत बेहतर और संतुलित चैनल को! ऐसी भी क्या 'इमर्जेेन्सी' थी....

उर्मिलेश, वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक और पत्रकार

'इमर्जेन्सी' की याद दिलाने के लिये 'इमर्जेेन्सी' जैसा कुछ न कुछ किया जाता रहेगा! NDTV-India के प्रसारण पर एक दिन की रोक लगाने का केंद्र सरकार का फैसला कुछ इसी प्रकार का है। 4 जनवरी,2016 को पठानकोट एयर बेस में सुरक्षा बलों के काउंटर-आपरेशन के कवरेज में राष्ट्रीय़ सुरक्षा से कथित समझौता करते प्रसारण के लिये सरकार ने NDTV-India को दंडित करने का फैसला किया है। 

मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक उस दिन सुरक्षा बल आतंकी हमले के खिलाफ आपरेशन चला रहे थे। सरकार को चैनल के 6 मिनट के एक खास प्रसारण पर गहरी आपत्ति है। सवाल है, उस दिन तो सारे चैनलों ने उस तरह का कवेरज किया। एक दर्शक के तौर पर मेरा आकलन है कि NDTV-India का कवेरज अन्य चैनलों जैसा ही था, उसमें कुछ भी अलग नहीं था। ऐसे में सिर्फ एक चैनल को क्यों दंडित किया जा रहा है? 

जहां तक केबल TV नेटवर्क एक्ट-1994 और अन्य सम्बद्ध सरकारी कानूनों के उल्लंघन का सवाल है, हिन्दी-अंगरेजी के कई चैनल उसके प्रावधानों की धज्जियां उड़ाते रहते हैं। कइयों पर अंध-विश्वास बढ़ाते कार्यक्रमों की झड़ी लगी हुई है। विज्ञापन-प्रसारण के मामले में भी रोजाना उल्लंघन होते हैं? क्या यह सब सरकारी कानून का उल्लंघन नहीं है? सरकार को ऐसे उल्लंघनों पर कोई आपत्ति नहीं! 

कैसी विडम्बना है, सरकार ने कानून-उल्लंघन के लिये दंडित करने का फैसला भी किया तो हिन्दी के एक अपेक्षाकृत बेहतर और संतुलित चैनल को! ऐसी भी क्या 'इमर्जेेन्सी' थी? ज्यादा नाराजगी थी तो एक नोटिस देकर चेतावनी दी जा सकती थी। पर यहां तो प्रसारण रोकने का फैसला आ गया। एक पत्रकार और नागरिक के रूप में मैं इसकी निन्दा करता हूं क्योंकि इस फैसले में किसी एक को चुनकर दंडित करने का पूर्वाग्रह दिखता है।

एनडीटीवी पर लगा प्रतिबंध, पहली बार किसी चैनल के खिलाफ हुई ऐसी कार्यवाही


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से गठित कई मंत्रालयों के प्रतिनिधियों ने आज सुझाव दिया है कि एनडीटीवी पर एक दिन के लिए प्रतिबंध लगा दिया जाना चाहिए। देश के इस मुख्य चैनल पर प्रति​बंध का फैसला मंत्रालय प्रतिनिधियों की ​समिति ने इसलिए लिया है कि चैनल ने पठानकोट हमला मामले में देश विरोधी रिपोर्टिंग की थी। समिति में शामिल मंत्रालय प्रतिनिधियों के मुताबिक चैनल द्वारा की गयी रिपोर्टिंग से देश सुरक्षा और संप्रभुता खतरे में पड़ी। चैनल 9 नवम्बर को  दिन भर प्रसारित नहीं होगा। 

गौरतलब है कि पत्रकारिता के इतिहास में यह पहली घटना है जब किसी सरकार ने किसी चैनल को प्रतिबंधित किया है. एनडीटीवी अधिकारियों ने इस बारे में कोई टिप्पणी करने से मनाही की है. आउटलुक अंग्रेजी की वेबसाइट के अनुसार एनडीटीवी पर यह  कार्यवाही जनवरी में हुए पठानकोट हमले में मामले में की गयी है. 

रिहाई मंच पदाधिकारी पर हमले की असल वजह बने ये 10 सवाल

फर्जी मुठभेड़ों और गिरफ्तारियों के मामले में पुलिस और प्रशासन की नाक में दम किए रहने वाले रिहाई मंच ने सिमी कार्यकर्ताओं की हत्या को लेकर मध्य प्रदेश पुलिस पर दोटूक सवाल उठाए थे। 31 अक्टूबर को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर मंच ने पांच सवाल उठाए, जिसके बाद से मुठभेड़ की कहानी पहले से अधिक बेपर्द हुई। 

मंच ने भोपाल सेन्ट्रल जेल में कैद अमजद, जाकिर हुसैन सादिक, मोहम्मद सालिक, मुजीब शेख, महबूब गुड्डू, मोहम्मद खालिद अहमद, अकील और माजिद के जेल से फरार होने और पुलिस द्वारा मुठभेड़ के दावे पर कुछ जो अहम सवाल उठाए, वह इस प्रकार से हैं और पुलिस द्वारा उन पर हमले की असल वजह भी यही सवाल हैं। 

1. भोपाल सेन्ट्रल जेल को अंतरराष्ट्रीय मानक आईएसओ-14001-2004 का दर्जा प्राप्त है, जिसमें सेक्यूरिटी भी एक अहम मानक है। ऐसे में वहां से फरार होने की पुलिसिया पटकथा अकल्पनीय है।

2. पुलिस जिन कैदियों को मुठभेड़ में मारने का दावा कर रही है उसमें से तीन कैदियों को वह खंडवा के जेल से फरार होने वाले कैदी बता रही है। इस साबित होता है कि मध्य प्रदेश सरकार आतंक के आरोपियों की झूठी फरारी और फिर गिरफ्तारी या फर्जी मुठभेड़ में मारने की आड़ में दहशत की राजनीति कर रही है।

3. यहां पर अहम सवाल है कि जिन आठ कैदियों के भागने की बात हो रही है वह जेल के ए ब्लाक और बी ब्लाक में बंद थे। मंच को प्राप्त सूचना अनुसार मारे गए जाकिर, अमजद, गुड्डू, अकील खिलजी जहां ए ब्लाक में थे तो वहीं खालिद, मुजीब शेख, माजिद बी ब्लाक में थे। इन ब्लाकों की काफी दूरी है। ऐसे में सवाल है कि अगर किसी एक ब्लाक में कैदियों ने एक बंदी रक्षक की हत्या की तो यह कैसे संभव हुआ कि दूसरे ब्लाक के कैदी भी फरार हो गए।

4. पुलिस चादर को रस्सी बनाकर सीढ़ी की तरह इस्तेमाल करने का दावा कर रही है। जबकि चादर को रस्सी बनाकर ऊपर ज्यादा ऊंचाई तक फेंका जाना संभव ही नहीं है यदि फेंका जाना संभव भी मान लिया जाए तो इसकी संभावना नहीं रहती कि वह फेंकी गई चादर कहीं फंसकर चढंने के लिए सीढ़ी का काम करे।

5. जेल के पहरेदार सिपाही को चम्मच से चाकू बनाकर गला रेतना बताया जा रहा है, जिसके कारण यह संभवना समाप्त हो जाती है कि उनके पास हथगोला और हथियार था जिसका प्रयोग मुठभेड़ में किया गया। दूसरे एक आदमी को मारकर कोई पुलिस चौकी की कस्टडी से नहीं भाग सकता किसी सेन्ट्रल जेल से भागना अकल्पनीय है।

6. एक संभावना और बनती है कि जेल से निकलने बाद उनको किसी ने विस्फोटक तथा हथियार मुहैया कराए हों लेकिन पुलिस की कहानी में ऐसा कोई तथ्य अभी तक सामने नहीं आया है।

7. जेल में लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज के बारे में अब तक कोई बात क्यों सामने नहीं आई।

8. पुलिस के दावे के अनुसार जिन आठों कैदियों की मुठभेड़ में मारने की बात कही जा रही है उसमें से कुछ के मीडिया में आए फोटोग्राफ्स, जिसमें उनके हाथों में घड़ी, पैरों में जूते आदि हैं, से यह भी संभावना है कि कहीं उन्हें किसी दूसरे जेल में शिफ्ट करने के नाम पर तैयार करवाया गया हो और फिर ले जाकर पुलिस ने फर्जी मुठभेड़ को अंजाम दे दिया हो।

9. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान ने अपने बयान में यह कहा है कि इस मामले में जनता का सहयोग मिला, लोगों से सूचना मिली और लोकेशन का पता लगा लेकिन मुख्यमंत्री जी को यह बताना चाहिए कि इतनी जल्दी आम लोग को जेल से फरार अभियुक्तों को कैसे पहचान गए।

10. पुलिस के दावे अनुसार फरार आठों अभियुक्तों की मुठभेड़ के दौरान हत्या यह भी सवाल उठाती है कि इतनी पुलिस की ‘बहादुराना’ कार्रवाई पर किसी ने क्या सरेंडर करने का प्रयास नहीं किया होगा। या फिर उन्हें उठाकर वहां ले जाकर आठों को मारकर पुलिस इस मामले कोई सुबूत नहीं छोड़ना चाहती थी।

इस मसले पर रिहाई मंच महासचिव और लखनऊ पुलिस के हमले के शिकार हुए राजीव यादव ने भोपाल जेल इनकाउंटर में मारे गए जाकिर हुसैन के पिता बदरुल हुसैन से इस घटना के संबन्ध में बात की। राजीव के मुताबिक वे इस घटना से काफी स्तब्ध थे और उन्होंने बताया कि उनका एक और बेटा अब्दुल्ला उर्फ अल्ताफ हुसैन भी जेल में बंद है। उसकी सुरक्षा को लेकर वह बेहद चिंतित हैं। 

रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव ने कहा कि भोपाल में हुई घटना के बाद देश के विभिन्न जेलों में कैद आतंक के आरोपियों के परिजन काफी डरे हुए हैं कि कहीं इंसाफ मिलने से पहले ही उनके बच्चों का कत्ल न कर दिया जाए, जिस तरह से यर्वदा जेल में कतील सिद्दीकी और लखनऊ में खालिद मुजाहिद का पुलिस ने हिरासत में कत्ल कर दिया था। ऐसे में रिहाई मंच ने देश के विभिन्न जेलों में बंद आतंक के आरोपियों की सुरक्षा की गांरटी की मांग की है ताकि टेरर पाॅलिटिक्स का असली चेहरा सामने आ सके न कि बेगुनाहों की लाशें। मंच जल्द मध्य प्रदेश का दौरा करेगा।