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Jun 5, 2017

एनडीटीवी इतनी आसानी से नहीं बना है जो आप मिटा देंगे : रवीश कुमार

र​वीश कुमार की मोदी को ललकार, कभी आमने—सामने तो आइए 

सरकार विरोधी माने जाने वाले एनडीटीवी समूह के संपादक प्रणब रॉय के यहां 2010 के एक बैंक फ्रॉड के मामले में हुई छापेमारी के बाद पूरे देश से तीखी प्रतिक्रियाएं हो रही हैं। भाजपा को छोड़ ज्यादातर पार्टियों ने सरकार की इस कार्यवाही की निंदा की है। देश के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने सरकार की हां में हां नहीं मिलाने वाली मीडिया के मूंह पर जाबी लगाने की कायराना हरकत बताया है।

गौरतलब है कि तीन दिन पहले भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा एनडीटीवी अंग्रजी के डिबेट में शामिल होने एनडीटीवी के दफ्तर पहुंचे थे। शो में बहस के दौरान संबित ने एंकर निधि राजदान के एक सवाल पर एनडीटीवी को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि आपलोगों का एक एजेंडा है, जिसपर आपलोग काम करते हैं। 

संबित के कहे पर एंकर ने ऐतराज किया पर संबित ने अपनी बात जारी रखी और एजेंडा वाली बात पर अड़े रहे। ऐसे में एंकर निधि राजदान ने उन्हें शो से जाने को कहा और संबित को शो से जाना पड़ा। 

माना जा रहा है कि भाजपा सरकार ने अपने प्रवक्ता की इस बेइज्जती का बदला लिया है और एनडीटीवी को सबक सिखाने के लिए छापेमारी करवाई है। भाजपा की इस प्रतिक्रियावादी कार्यवाही पर ज्यादातर पार्टियों ने भाजपा और मोदी सरकार की आलोचना की है और कहा है कि मीडिया की आवाज को इस तरह से दबाया जाना कहीं से भी लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं कहा जा सकता है। 

सरकार की कार्यवाही से आहत एनडीटीवी के सबसे प्रखर एंकर रवीश कुमार ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि मोदी सरकार देश में सिर्फ गोदी मीडिया को देखना चाहती है।

Nov 7, 2016

बागों में बहार है, बैकफुट पर सरकार है



ब्रॉडकास्टिंग कानून-उल्लंघन के लिये दंडित किए गए NDTV इंडिया पर से केंद्र की भाजपा सरकार ने फिलहाल  9 नवंबर को एक दिन के लिए ऑफ एयर करने का प्रतिबंध स्थगित कर दिया है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने यह फैसला किया है।

गौरतलब है कि मीडिया को बैन किए जाने के इस तानाशाहीपूर्ण फैसले के खिलाफ एडिटर्स गिल्ड, पत्रकार संगठनों, राजनीतिक पार्टियों और मीडिया माध्यमों ने बड़े स्तर पर अपना विरोध दर्ज कराया था। लगातार मांग की जा रही थी कि सरकार अपने इस तानाशाही पूर्ण फैसले को तत्काल वापस ले और ब्रॉडकास्टिंग मिनिस्ट्री को सख्त हिदायत दे कि वह पूर्वग्रह​ ग्रसित और राजनीति परस्त कार्रवाही से भ​विष्य में बाज आए। सरकार के इस फैसले को लगातार गैरकानूनी और असंवैधानिक करार ठहराया जा रहा था।

चैनल पर इस बैन की वजह इस साल जनवरी में पंजाब के पठानकोट स्थित एयरबेस पर हुए आतंकी हमले के दौरान प्रसारण नियमों का उल्लंघन बताई गई थी। सरकार के इस फैसले के खिलाफ NDTV इंडिया कोर्ट में पहुंच गया था। 

Nov 4, 2016

एनडीटीवी को लेकर वायरल हो रहा है यह प्रस्ताव, सहमत हों तो कीजिए शेयर


हम देशवासी एनडीटीवी पर थोपे गए 9 नवंबर के प्रतिबंध के खिलाफ हैं और इस बात से सहमत हैं कि एनडीटीवी अन्य सामाचार चैनलों से बेहतर, तार्किक और सही खबरें देता है। हम करोड़ों दर्शकों की मांग है कि सरकार अपने इस तानाशाही पूर्ण फैसले को तत्काल वापस ले और ब्रॉडकास्टिंग मिनिस्ट्री को सख्त हिदायत दे कि वह पूर्वग्रह​ ग्रसित और राजनीति परस्त कार्रवाही से भ​विष्य में बाज आए। 
सरकार अगर ऐसा नहीं करती है तो 
हम करोड़ो देशवासी आज फैसला लेते हैं कि एनडीटीवी को प्रतिबंधित किए जाने के दिन 9 नवंबर को देश का कोर्इ चैनल नहीं देखेंगे, अपनी टीवी नहीं खोलेंगे।  

दोस्तो, ध्यान रखिए आज आप नहीं खड़े होंगे तो कल कोई डटकर मुकाबला करने वाला नहीं बचेगा।   

Nov 3, 2016

एनडीटीवी पर लगा प्रतिबंध, पहली बार किसी चैनल के खिलाफ हुई ऐसी कार्यवाही


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से गठित कई मंत्रालयों के प्रतिनिधियों ने आज सुझाव दिया है कि एनडीटीवी पर एक दिन के लिए प्रतिबंध लगा दिया जाना चाहिए। देश के इस मुख्य चैनल पर प्रति​बंध का फैसला मंत्रालय प्रतिनिधियों की ​समिति ने इसलिए लिया है कि चैनल ने पठानकोट हमला मामले में देश विरोधी रिपोर्टिंग की थी। समिति में शामिल मंत्रालय प्रतिनिधियों के मुताबिक चैनल द्वारा की गयी रिपोर्टिंग से देश सुरक्षा और संप्रभुता खतरे में पड़ी। चैनल 9 नवम्बर को  दिन भर प्रसारित नहीं होगा। 

गौरतलब है कि पत्रकारिता के इतिहास में यह पहली घटना है जब किसी सरकार ने किसी चैनल को प्रतिबंधित किया है. एनडीटीवी अधिकारियों ने इस बारे में कोई टिप्पणी करने से मनाही की है. आउटलुक अंग्रेजी की वेबसाइट के अनुसार एनडीटीवी पर यह  कार्यवाही जनवरी में हुए पठानकोट हमले में मामले में की गयी है.