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Jun 15, 2017

केजरीवाल के दो चेलों की वाट्सअप चैट, बताएगी कैसी राजनीति हो रही आप में

दोनों नेता अरविंद केजरीवाल के ही बागवानी के दो फूल हैं, जिसे पानी—खाद डालकर अरविंद ने अपने हाथों से सींचा है...

दिल्ली से स्वतंत्र कुमार की रिपोर्ट 



दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी अपनी किसी और नीति पर कायम रहे या न रहे, लेकिन वह शुरुआत से ही अपने ही नेताओं के खिलाफ साजिश रचने, उन्हें निपटाते रहने की परंपरा पर लगातार कायम है। माना जाता है कि केजरीवाल के लिए जो भी नेता चुनौती बनता है, या उन्हें लगता है कि उनकी राजनीतिक सल्तनत पर कोई हक जमा सकता तो उसे नितटा देने में पूरी पार्टी को लगा देते हैं। 

अबकी भी यही हो रहा है। अरविंद केजरीवाल ने दो लोगों को ढंग से निपटाने का ठेका पार्टी पदाधिकारियों को दे रखा है। जिनको निपटा देना है, वे हैं कपिल मिश्रा और कुमार विश्वास। मिश्रा और विश्वास वही लोग हैं जिनका एक समय में इस्तेमाल अरविंद ने स्वराज पार्टी के अध्यक्ष योगेंद्र यादव और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण को निपटाने के लिए किया था। गौरतलब है कि योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण आम आदमी पार्टी के संस्थापकों और बड़े नेताओं में शामिल रहे हैं। 

कपिल मिश्रा के खुलासों को हाशिए पर डालने और कुमार विश्वास की छवि को कार्यकर्ताओं में धुमिल करने की जिम्मेदारी अरविंद केजरीवाल टीम की ओर से ओखला विधायक अमानतुल्लाह खान को दी गयी है। मतलब मोर्चे पर अमानतुल्लाह हैं, जबकि पीछे से दिल्ली आप के पूर्व मुखिया दिलीप पांडेय, पार्टी खजांची दीपक वाजपेयी, मनीष सिसौदिया के साले संजय राघव समेत दर्जनों पार्टी पदाधिकारी परोक्ष—प्रत्यक्ष रूप से जुटे हुए हैं। 

कल हुए एक नाटकीय घटनाक्रम के तहत दिल्ली के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा आज ओखला क्षेत्र के विधायक अमानतुल्ला खान के खिलाफ ओखला के बाटला हाउस इलाके में धरना देंगे। कपिल मिश्रा के मुताबिक यह धरना बाटला हाउस में रहने वाली एक 70 वर्षीय वृद्ध महिला के घर पर कब्जा किए जाने को लेकर है। मिश्रा का कहना है कि महिला के घर पर विधायक अमानतुल्ला के इशारे पर कब्जा हुआ है। ​कब्जा करने वाले विधायक के लोग हैं। 

पर असल ये बात ये नहीं है, बल्कि बात है कपिल मिश्रा और अमानतुल्लाह के बीच हुई 13 नवंबर की रात वाट्स्अप चैट, जिसे थोड़ी देर के लिए कपिल मिश्रा ने ट्वीटर पर लगाया पर बाद में हटा दिया। 

मगर जनज्वार के पास वह पूरी बातचीत है जिसको पढ़कर आपको पता चल जाएगा कि असल में ये दोनों नेता किस स्तर के हैं और इनका असल मकसद क्या है? साथ ही आपको फैसला करने में भी आसानी होगी कि आम आदमी पार्टी किस राह पर है, क्योंकि दोनों की नेता अरविंद केजरीवाल के ही बागवानी के दो फूल हैं, जिसे पानी—खाद डालकर अरविंद ने अपने हाथों से सींचा है!  





May 8, 2017

सिर्फ 'एक काबिलियत' ने बनाया कपिल को केजरीवाल का प्रिय मंत्री

देश की जनता को ईमानदारी और नए लोकतंत्र का झुनझुना थमाकर अरविंद केजरीवाल बनने तो सिकंदर चले थे, पर औकात इतनी हो पाई कि वह अपने ही पाले हुए संपोलों को बस में रख सकें। उन्हीं संपोलों में से एक हैं कपिल मिश्रा, जिनको अरविंद ने अपना दूध पिलाकर किंग कोबरा बनाया था। किंग कोबरा अब फुंफकार रहा है और अरविंद हैं कि उनको जादू—मंतर का कोई सम्मोहनी मंत्र सूझ नहीं रहा! 

दिल्ली से भूपेंदर चौधरी की रिपोर्ट 


सम्मोहनी मंत्र के अभाव में पिछले तीन दिनों से अरविंद केजरीवाल सदमे में हैं। 

हालांकि उनको सदमे में होना नहीं चाहिए, क्योंकि केजरीवाल और आरोपों—प्रत्यारोपों का रिश्ता कोई नया नहीं है। बल्कि उनकी छवि है कि वह रोज सुबह उठते ही दो—चार आरोप किसी न किसी नेता—पार्टी, व्यवसायी, पुलिस पर लगा दिया करते हैं, फिर फ्रेश होने जाते हैं। उनके नजदीकी लोग कहते हैं, फ्रेश होने में आरोप उनके लिए वही काम करता है जैसे आम जनों के लिए सिगरेट, चाय, बीड़ी, खैनी या पानी। 

पर सच यही है कि अरविंद केजरीवाल सदमे में हैं। उन पर तानाशाह, झूठा, मक्कार, कुंडलीमार, राजनीतिक काइयांपन का रणनीतिकार और यूज एंड थ्रो वाली पॉलिटिकल स्टाइल का महारथी जैसे आरोप तो लगे थे, लेकिन अभी तक अरविंद केजरीवाल की 'एमएसपी' पर ऐसी चोट किसी ने नहीं की थी कि केजरीवाल कहीं मुंह दिखाने लायक न रह जाएं। 

वह पिछले तीन दिनों से सिर्फ जवाब खोज रहे हैं कि वह अपने ही सरकार में मंत्री रहे 'कपिल भाई' के आरोपों का मीडिया के सामने जवाब देंगे? कैसे बताएंगे कि मेरा सबसे प्रिय मंत्री कपिल  मुझ पर 2 करोड़ रुपए लेने का आरोप लगा रहा है, वह सच नहीं है। वह भी कपिल के आंखों देखी को कैसे झुठलाएंगे, वह भी दूसरे प्रिय मंत्री सत्येंद्र जैन के सामने की बात कह रहा है और सबसे बड़ी बात रिश्तेदार की जमीन डील के मामले में 2 करोड़ कमीशन लिए जाने का आरोप? 

जानकार बता रहे हैं कि केजरीवाल अभी भी कोशिश में हैं कि किसी तरह मामला शांत हो और मीडिया में हीरो बने कपिल मिश्रा को हाशिए पर डाला जा सके। इसीलिए दिल्ली सरकार के मंत्री मनीष सिसोदिया 25 सेकेंड में प्रेस कांफ्रेंस करके कट लेते हैं? कपिल मिश्रा से केजरीवाल नहीं उलझना चाहते क्योंकि वह उनके गहरे राज के साथी हैं? कई गुनाहों में केजरीवाल ने कपिल का इस्तेमाल किया है? बहुत कुछ अनौपचारिक और औपचारिक कपिल केजरीवाल बारे में जानते हैं जो एक पाला हुआ संपोला ही जान सकता है।  

ये वही कपिल मिश्रा हैं जो अरविंद केजरीवाल के इशारे पर आम आदमी पार्टी के सबसे बुजुर्ग संस्थापक शांति भूषण और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण को भरी सभा में मारने के लिए दौड़ा लिए थे।  

समय का चक्र भी कितना बलवान होता है। कब किस तरफ घूम जाए किसी को नहीं पता चलता। शायद कभी कपिल मिश्रा ने भी ये नहीं सोचा होगा कि जो खाई उन्होंने प्रशांत भूषण और शांति भूषण जैसे वरिष्ठों के लिए खोदी थी एक दिन वो खुद उसमें गिरेंगे।

यह बात साल 2015 की है। आम आदमी पार्टी दिल्ली में 67 एमएलए के साथ प्रचंड बहुमत के दिल्ली की सत्ता पर काबिज हुई थी। स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव और वकील प्रशांत भूषण की अरविंद केजरीवाल को सलाह थी कि वे संयोजक पद छोड़कर बतौर मुख्यमंत्री दिल्ली पर फोकस करें। 

मगर अरविंद केजरीवाल को उनकी यह बात खटकने लगी थी। कुछ दिन बाद करनाल बाई पास के पास बने आप के एमएलए के रिसोर्ट में पार्टी की नेशनल कौंसिल की मीटिंग रखी गई। योगेंद्र यादव और प्रशांत को निकालने की साज़िश रची जा चुकी थी। जैसे ही मीटिंग शुरू हुई तो प्रशांत ओर शांति भूषण ने कुछ बोलने की कोशिश की। 

तभी केजरीवाल की तय स्क्रीप्ट के अनुसार कपिल मिश्रा भूषण बाप—बेटे को चुप रहने और बाहर निकल जाने को लेकर शोर मचाने लगे। शोर कई लोग मचा रहे थे पर कपिल सबसे आगे थे।  इस पर नेशनल कौंसिल के कुछ मेंबर ने प्रशांत से सहमति जताते हुए उनके समर्थन में बोलने की कोशिश की तो कपिल मिश्रा और एक अन्य एमएलए दोनों बाप और बेटे को मीटिंग हॉल से बाहर करने के लिए उनके पीछे मारने के लिए दौड़ पड़े। 

हालांकि लोगों ने उन्हें शांति बनाए रखने की अपील की, जिसमें मनीष सबसे प्रमुख थे। लेकिन एक बात साफ थी कि वो बस दिखावा था। पीछे से कपिल को केजरीवाल का पूरा समर्थन था। 88 साल के बुजुर्ग शांति भूषण बहुत ही लाचार दिख रहे थे। उनकी आंखों में जैसे लाचारी साफ देखी जा सकती थी। 

नेशनल कौंसिल के कुछ सदस्य इस घटना से इतने आहत थे कि उन्हें खुद अपनी बेबसी पर रोना आ रहा था। इतने बुजुर्ग आदमी को धक्के मार के बाहर निकला जा रहा था और उसकी अगुआई कपिल मिश्रा कर रहे थे। 

कपिल मिश्रा ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि एक दिन उन्हें भी इस पार्टी से ऐसे ही धक्के मार के मंत्री पद से निकाल दिया जायेगा।