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Jun 10, 2017

तैयारी की स्ट्रीट लाइट के सामने, रियाज किया दरवाजे पर और टॉप कर गयी जिला

सफलता की कहानियां तो बहुत पढ़ते हैं आप, पर इस बेटी की इच्छाशक्ति देख आप दांतों तले अंगुलियां दबा लेंगे। इलाज के अभाव में मरे पिता की लाश पड़ी थी दरवाजे पर, हिम्मत नहीं थी कि परीक्षा केंद्र तक जाए, लेकिन विराट कोहली के उदाहरण ने उसे किया था इंस्पायर....

संजीव चौधरी

मुजफ्फरनगर। शुक्रवार 9 जून, 2017 को उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद् की बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाओं का परिणाम आया है, जिसके बाद कहीं ख़ुशी कहीं गम देखने को मिला। आज के भौतिक युग में जहां तमाम सुख—सुविधाओं के बाद भी कई सम्पन्न घरानों के बच्चे परीक्षा में ज्यादा अंक प्राप्त नहीं कर पाते, वहीं एक ऐसी प्रतिभा भी है जिसने गरीबी और मुफलिसी के बाद भी अपने मृतक पिता का सपना साकार किया है। मीनाक्षी ने गरीबी के चलते स्ट्रीट लाइट की रौशनी में पढ़कर इंटर की परीक्षा में न केवल अपना विद्यालय टॉप किया, बल्कि जनपद में दूसरा स्थान प्राप्त किया है।

अपनी माँ  के साथ मीनाक्षी 
मुजफ्फरनगर जिले के गांव अलमासपुर निवासी ऋषिपाल की बेटी मीनाक्षी शर्मा लाला जगदीश प्रसाद सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कालेज की 12वीं की छात्रा है, जिसने बोर्ड की परीक्षा में 500 में से 459 अंक पाकर अपना विद्यालय तो टॉप किया ही है, साथ में जनपद में भी दूसरा स्थान प्राप्त कर अपने मृतक पिता का भी सपना साकार किया है। मीनाक्षी बहुत गरीब परिवार से ताल्लुक रखती है। उसके पिता की बीमारी के चलते और गरीबी के कारण इलाज के अभाव में उसी दिन मौत हो गयी थी, जिस दिन मीनाक्षी की अंग्रेजी विषय की परीक्षा थी। 

मीनाक्षी ने बताया उसके पिता रिक्शा चलाकर परिवार का पालन—पोषण करते थे। इसी बीच बीमारी के दौरान इलाज समय से ना करा पाने की वजह से उन्होंंने दम तोड़ दिया। पिता की मौत के बाद परिवार पर मानो आसमान टूट पड़ा और इसी मुफलिसी में मीनाक्षी ने स्ट्रीट लाइट की रौशनी और किवाड़ का ब्लैक बोर्ड बनाकर पढाई की।

मीनाक्षी कहती हैं, मेरे 90.8 प्रतिशत अंक आये हैं इस बात की ख़ुशी भी है, लेकिन पापा का गम भी है। आज मेरी फोटो तमाम पेपरों में छपी है, मगर यह सब देखने के लिए मेरे पापा जिंदा नहीं हैं। वो चाहते थे कि मेरा फोटो अखबार में छपे। पिता की मौत के बारे में बताते हुए वो कहती है, उन्हें सैप्टिक हो गया था। डॉक्टर ने हमें इसके बार में बताया नहींं। हमने सोचा ऐसे ही छोटी—मोटी फुंसी हैं ठीक हो जायेगी। बाद में जब हम उन्हें एसडी हॉस्पिटल लेकर गए तो सेप्टिक का पता चला। 

हमारी आर्थिक हालत इतनी अच्छी नहीं थी कि हम उन्हें मेरठ ले जाते। हम उन्हें डॉक्टर अंसारी के पास लेकर गए। उन्होंने कहा दवाई दे देता हूं वो ठीक हो जाएंगे। हम उन्हें वापस घर लेकर आये तो उन्होंने सुबह अपनी पहली डॉज ली और फिर थोड़ी देर बाद उनकी डेथ हो गयी। 

जब पिता की मौत हुई उस वक्त मेरे दो पेपर रह रहे थे। मेरे पापा नानाजी के साथ काम भी करते थे। उन्होंने रेड़ा और रिक्शा भी चलाया। दरवाजे को ब्लैकबोर्ड क्यों बनाया? के जवाब में मीनाक्षी कहती हैं, गेट पर इस वजह से लिखा क्योंकि मेरा सब्जेक्ट मेथ था। उसमें एक सवाल करो तो पेज भर जाता है, तो काफी कॉपी यूज होती थी। 

ज्यादा कॉपी भरने पर मम्मी ने कहा बोर्ड पर लिख लो इसलिए मैंने दरवाजे को ब्लैकबोर्ड बना लिया। स्ट्रीट लाइट के नीचे बैठकर पढ़ाई की। रात को बेट्री चार्ज करा लेते थे तो उससे पढ़ती थी, सुबह 4 बजे से मोबाइल से पढ़ती थी।

मेरे नंबर अच्छे आए हैं, मगर मुझे थोड़ी ज्यादा की उम्मीद थी। इंग्लिस में मेरे नंबर कम आये हैं, क्योंकि उसी दिन मेरे पापा एक्सपायर हुए थे। पापा मुझसे कहते थे कि विराट कोहली के पापा जब एक्सपायर हुए थे, तो उसने अपने पापा को नही देखा था, वो देश के लिए खेल रहे थे। पापा की इस बात से मुझे सीख मिली और मैंने रोने के बजाय पापा की इस बात को गांठ बांध लिया। आगे क्या करने का विचार है? पूछने पर वो कहती है बीएससी करूंगी, फिर एमएससी और फिर यूजीसी नेट करके प्रोफेसर बनूंगी।

मीनाक्षी की सफलता पर उसकी मां पूजा शर्मा कहती हैं, ख़ुशी है, पर थोडा दुःख भी है। दुःख इसके पापा की तरफ से है कि वो नहीं रहे। उनका सपना था कि मेरी बेटी का फोटो न्यूज़ पेपर में छपे। आज इस लड़की ने अपने पापा का सपना पूरा किया है, लेकिन वो नही हैं। सारे रिश्तेदार मीनाक्षी की सफलता से बहुत खुश हैं। उनके न रहने से हमें आर्थिक कठिनाइयां आएंगी, पर मैं बिटिया की पढ़ाई रुकने नहीं दूंंगी। कुछ भी करूंगी उसके लिए। 

मैं मिडडे मील में काम करती हूं, मगर उसमें भी बहुत कम पैसा मिलता है, आगे अब कुछ और काम करने के लिए भी सोचना पड़ेगा। फिलहाल तो हमारा परिवार मीनाक्षी के नानाजी पर ही निर्भर है आर्थिक तौर पर। मगर वो भी बूढ़े हो रहे हैं।

देखें वीडियो :