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Nov 3, 2016

एसटीएफ के पूर्व मुखिया ने कहा, थाली—चम्मच से बन सकते धारदार हथियार, लकड़ी की चाबी में भी कुछ नया नहीं

मध्यप्रदेश पुलिस के कई दावों को माना सच तो कुछ पर उठाए सवाल
 कहा, वाहवाही पाने के लिए हुई हत्या 



हरियाणा पुलिस के पूर्व एसटीएफ मुखिया और आईपीएस अधिकारी रहे विकास नारायण राय ने अपने लंबे अनुभव के आधार पर सोशल मीडिया में भोपाल जेल से भागे सिमी आरोपियों और उनकी हुई कथित हत्या को लेकर 8 महत्वपूर्ण प्वाइंट गिनाए हैं। ये प्वाइंट आपको पुलिसिया दावेदारी के सच और झूठ के बीच फर्क करने में मदद देंगे। साथ ही पूर्वग्रह के आधार पर बन रही आपकी समझदारी को भी दुरुस्त करेंगे कि पुलिस सबकुछ झूठ ही नहीं बोलती।  

विकास नारायण राय अपने फेसबुक पोस्ट पर लिखते हैं, भोपाल जेल से फरार हुए आठ सिमी कैदियों की पुलिस मुठभेड़ पर अटकलबाजियां स्वाभाविक हैं| पर मैं अपने अनुभव के आधार पर कहना चाहूँगा कि - 

  • थाली, चम्मच से धारदार हथियार बनाना जेल जीवन में आम है, कोई अजूबा नहीं | लकड़ी की चाभी भी | कम्बलों व चादरों की मदद से दीवार फांदना भी |
  •  जाहिर है कि जेल की सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही रही होगी जिसका लाभ इन कैदियों ने उठाया | जेल रक्षक यादव की हत्या भी इन्होने की होगी अन्यथा वे चाभियाँ हथिया कर गुप-चुप निकल नहीं सकते थे | 
  • यह भी स्पष्ट है कि गाँव वालों ने उन्हें देख लिया होगा और एसटीएफ को इससे उन्हें घेरने में मदद मिली 
  • कैदियों के पास पिस्तौल वगैरह जैसे हथियार नहीं थे | तभी उन्होंने घिरने पर पत्थर का इस्तेमाल किया |
  • एसटीएफ का उन्हें गोलियों के आदान-प्रदान में मार गिराना एक गढ़ी हुयी कहानी है | सही छान-बीन और मेडिकल व फॉरेंसिक सबूतों से सच्चाई जानना मुश्किल नहीं | वे हर तरह से घिर गए थे अन्यथा सभी नहीं मारे जाते, कुछ बच भी निकलते | ऐसे में उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए था |
  •  भारत में कानून से भागनेवालों को जान से मारने की व्यवस्था नहीं है | लिहाजा उनकी मौत, प्रतिशोध और वाह-वाही के लिए की गयी हत्या है |
  •  अब तक का सरकारी रवैया लीपा-पोती का है और इससे क़ानून-न्याय व्यवस्था पर प्रश्न-चिन्ह लगना स्वाभाविक है | 
  • इन कैदियों के आपराधिक इतिहास को देखते हुए इन्हें आतंकवादी ही कहा जायेगा, उसी तरह जैसे समझौता, माले गाँव इत्यादि मामलों में ट्रायल भुगत रहे असीमानंद, प्रज्ञा ठाकुर और कर्नल पुरोहित आतंकवादी कहलाते हैं | इन आठ में से तीन पहले भी एक अन्य जेल से एक और जेल रक्षक की हत्या कर इसी तरीके से फरार हो चुके थे |