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Jun 25, 2011

दलित महिलाओं पर शिक्षा मंत्री की दबंगई

इस बात पर किसी ने भी यह गौर करना उचित नहीं समझा कि आखिर पुष्पा देवी और उनके बेटे को हंगामा काटने पर क्यों मजबूर होना पड़ा। सबने बस वही सुना और लिखा जो पुलिस या मंत्री के समर्थकों ने कहा...

नरेन्द्र देव सिंह

पुष्पा देवी : उत्पीडन की शिकार
उत्तराखण्ड के नैनीताल जनपद के धारी ब्लाक के अन्तर्गत गांव सुई, रयूरीगाड़ निवासी पुष्पा सुयाल, उसके बेटे दीपक और सामाजिक कार्यकर्त्ता मुन्नी टम्टा को शिक्षा मंत्री गोविन्द सिंह बिष्ट के पीआरओ मदन पांडे की तहरीर पर धारा 151 के तहत जेल भेज दिया गया। गौरतलब है कि पुष्पा देवी और अनुसूचित जाति-जनजाति महिला उत्थान समिति की अध्यक्ष मुन्नी टम्टा दस जून को शिक्षा मंत्री के छडायल स्थित घर पर अपनी शिकायत दर्ज करने पहुंचे थे। जब पुष्पा देवी अपनी हिमायती महिला नेता के साथ गांव में दबंगों के हाथों उत्पीडित होने की शिकायत लेकर आयी थी, तब गोविन्द सिंह बिष्ट एक अधिकारी से बात कर रहे थे। 

शिक्षा मंत्री और  उनके समर्थकों के मुताबिक, पुष्पा देवी और  मुन्नी टम्टा कमरे में जबरन घुसने लगी. मना करने पर अनुसूचित जाति-जनजाति महिला उत्थान समिति की अध्यक्ष मुन्नी टम्टा  ने चप्पल उतार दी और शिक्षा मंत्री से अपशब्द कहे। इसी कारण मंत्री समर्थकों ने दोनों को बाहर खदेड़ा और उनकी पिटाई कर दी। इसके बाद कोतवाल प्रमोद शाह मुन्नी, पुष्पा और पुष्पा के बेटे को कोतवाली हल्द्वानी ले आये।

इस मामले में प्रमोद शाह शिक्षा मंत्री की आज्ञा का पालन करते दिखाई दिए, क्योंकि जब वह इन लोगों को गिरफ्तार करने आये तो उनके साथ कोई भी महिला पुलिसकर्मी नहीं थी। कोतवाली जाने के बाद पुष्पा देवी के बेटों का गुस्सा आक्रोश बनकर पुलिस की हीलाहवाली पर फूट पड़ा। करीब चार घंटे हंगामा होने के बाद उन्हें पुलिस की एकतरफा कार्रवाई का सामना करना पड़ा। 

इस पूरे मामले में इस बात पर किसी ने भी यह गौर करना उचित नहीं समझा कि आखिर पुष्पा देवी और उनके बेटे को हंगामा काटने पर क्यों मजबूर होना पड़ा। सबने बस वही सुना और लिखा जो पुलिस या मंत्री के समर्थकों ने कहा। असरदार लोगों की ऊंची आवाज से गरीब-दलित लोगों की चीखों को एक बार फिर से दबा दिया गया। 

पुष्पा देवी के बेटे सतीश ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि 16  मार्च को ग्राम सुई का ग्राम प्रधान सुभाष ब्रजवासी अपने 10-12 साथियों के साथ नशे में धुत  होकर लाठी-डंडों के साथ हमारे घर में घुस गया. उसने और उसके साथियों ने विधवा पुष्पा देवी और उसके तीनों बेटों की जमकर पिटाई की। साथ ही घर में तोडफोड़ भी की. 

जब सुभाष ब्रजवासी पुष्पा देवी और उसके परिवार को बेहोशी (अधमरी) की हालत में छोड़कर चला गया तो कुछ स्थानीय लोगों ने 108 एम्लेंबुस बुलाकर इन्हें पदमपुरी चिकित्सालय भिजवाया। जहां से इन्हें हल्द्वानी बेस अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। गौरतलब है कि यह मामला आपसी रंजिश के साथ-साथ सुभाष बृजवासी के गंदी नीयत का भी है। आरोप है कि सुभाष बृजवासी गांव की महिलाओं पर गंदी नीयत रखता है तथा अपनी दबंगई से गरीब और कमजोर लोगों को सताता है।

अस्पताल से कुछ ठीक होकर होने के बाद पुष्पा देवी ने मुक्तेश्वर थाने में सुभाष बृजवासी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करायी. उक्त नामजद लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई न होने के कारण पीड़ित पक्ष इस सम्बन्ध में तहसीलदार, जिलाधिकारी नैनीताल, एस.एस.पी. नैनीताल से भी मिल चुका था, मगर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई। इसीलिए मजबूर होकर पीड़ित परिवार अपनी फरियाद लेकर शिक्षा मंत्री गोविन्द सिंह बिष्ट के पास गया, परन्तु गोविन्द बिष्ट द्वारा मिलने से मना करने पर मामला बिगड़ गया। 


पुष्पा देवी ने शिक्षा मंत्री पर आरोप लगाया है कि सुभाष बृजवासी को गोविन्द सिंह बिष्ट का समर्थन प्राप्त है। इस कारण पुलिस भी सुभाष के खिलाफ कोई कार्रवाई करने से बचती है। फिलहाल पुष्पा सुयाल और मुन्नी टम्टा जमानत पर रिहा हो चुकी हैं। दलितों के साथ इतना सबकुछ होने के बाद भी दलित हितों की बड़ी-बड़ी बात करने वाले कोई भी दलित नेता इन लोगों की सुध् लेने नहीं आया। जेल से रिहा होने के बाद मुन्नी टम्टा ने शिक्षा मंत्री पर आरोप लगाते हुए कहा कि ‘पुलिस शिक्षा मंत्री  के दबाव में काम कर रही है. जब हमें शिक्षा मंत्री के निवास स्थान से गिरफ्तार किया गया था तो कोई भी महिला पुलिस नहीं थी.'


इसके साथ ही शिक्षा मंत्री ने भी हम लोगों से अपशब्द कहे तथा अशोभनीय बर्ताव किया। मुन्नी टम्टा और पुष्पा देवी के साथ हुआ वाकया यह दर्शाता है कि प्रदेश के शिक्षा मंत्री गोविन्द बिष्ट ने इन महिलाओं के प्रति बर्बरतापूर्वक कार्यवाही करवायी है, लेकिन सत्ता पाने के लिए तत्पर विपक्ष भी इन मुद्दों पर ध्यान देता हुआ नहीं दिख रहा है।


युवा पत्रकार  नरेन्द्र देव सिंह  उत्तराखंड के सामाजिक-राजनीतिक  मसलों पर लिखते हैं .