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Jul 13, 2011

यूपीए के सतवांसे में आया छत्तीसगढ़


छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद डॉ महंत प्रदेश के तीसरे व कांग्रेस के पहले केन्द्रीय मंत्री हैं। डॉ महंत को केन्द्रीय मंत्रीमंडल में शामिल किए जाने से धान का कटोरा कहलाने वाले छत्तीसगढ़ के कृषि में विकास की संभावनाएं बढ़ने की उम्मीद है...

राजेन्द्र राठौर

मनमोहन सिंह मंत्रीमंडल में बहुप्रतीक्षित फेरबदल की घोषणा 12 जुलाई को हो गई थी  । नई सूची से 6 केन्द्रीय मंत्रियों की छुट्टी कर दी गई है, जबकि डीएमके के लिए पद खाली रखा गया है। नए मंत्रीमंडल में छत्तीसगढ़ के कांग्रेस सांसद डॉ.चरण दास महंत को केन्द्रीय कृषि और खाद्य संस्करण राज्य मंत्री का दायित्व सौंपा गया है। छत्तीसगढ़ राज्य गठन दौरान एनडीए सरकार के केन्द्रीय मंत्रीमंडल में भाजपा से चुने गए सांसद रमेश बैस व वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह मंत्री थे, जबकि इस प्रदेश में कांग्रेस से पहली बार डॉ महंत को केन्द्रीय मंत्री बनाया गया है।

 मूलतः जांजगीर-चांपा जिला अंतर्गत सारागांव में पूर्व मंत्री स्वर्गीय बिसाहूदास महंत के घर जन्मे डॉ चरणदास महंत अन्य पिछड़ा वर्ग से हैं। अविभाजित मध्यप्रदेश में वे 1जनवरी 1980 को पहली बार विधायक चुने गए। इसके ठीक एक साल बाद उन्होंने सरकारी आश्वासन संबंधी समिति के अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली।

इसके बाद वे 1फरवरी 1981को प्रत्यायोजित विधान संबंधी समिति के सदस्य व 1 जनवरी 1985 को मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव बनाए गए। वर्ष 1988 में मध्यप्रदेश सरकार ने उन्हें पहली बार कृषि मंत्री बनाया। इसके बाद वे 1993में वाणिज्यिक कर विभाग में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), 1993 में मध्य प्रदेश विधान सभा के तीसरे कार्यकाल के सदस्य, 1995 में गृह और सार्वजनिक संबंध कैबिनेट मंत्री बने। तीन वर्षो तक मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री रहने के बाद वर्ष 1998में वे पहली बार जांजगीर लोकसभा क्षेत्र से सांसद निर्वाचित हुए।

यूपीए सरकार के पहले कार्यकाल की तरह दूसरे कार्यकाल के दो सालों में भी छत्तीसगढ़ को प्रतिनिधित्व नहीं मिला। केन्द्र सरकार के सौतेले व्यवहार से नाराज छत्तीसगढ़ की जनता डॉ. महंत को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल करने की लगातार मांग करती रही,लेकिन प्रदेश कांग्रेस की आंतरिक राजनीति में पार्टी के ही दिग्गज नेता मोतीलाल वोरा,विद्याचरण शुक्ल और पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी उनका विरोध करते रहे। तीनों ही नेता प्रदेश में किसी नए नेतृत्व को उभारने के पक्ष में नहीं थे।

पिछले दिनों केन्द्रीय मंत्रीमंडल में फेरबदल की सुगबुगाह शुरू होने पर कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने डॉ.महंत के लिए लॉबिंग की।  डॉ महंत को मंत्री बनाए जाने के बाद अब यह भी बाते सामने आ रही है कि पिछड़ा वर्ग 2003 से ही कांग्रेस से दूरी बनाए हुए है, जिस कारण राज्य में कांग्रेस को भाजपा के हाथों शिकस्त मिली थी। यही वजह है कि अन्य पिछड़ा वर्ग को लुभाने की दृष्टि से उन्हें मंत्री बनाया गया है।